उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में चुनाव के मौके पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की गैरमौजूदगी ने कांग्रेसियों की बेचैनी बढ़ा दी है। नोटबंदी के बाद मोदी पर हमलावर राहुल ने भूचाल तक लाने की चुनौती दी थी लेकिन 50 दिन पूरे होने पर उनके तेवर वैसे नहीं दिख रहे हैं।
राहुल पीएम मोदी से जवाब मांगने के बजाय ऐन मौके पर विदेश चले गए। चुनाव को लेकर पार्टी हाईकमान के ढीले रवैये से सूबे के कांग्रेसी मायूस हैं।
नोटबंदी के मसले पर राहुल गांधी ने पूरे देश में दौरा करने का एलान किया था। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में उन्होंने यूपी में नोटबंदी के विरोध में रैली करके मोदी सरकार को घेरने की बात कही थी। लेकिन सूबे में उन्होंने एक छोटी सी सभा तक नहीं की।
भले ही कांग्रेस चुनाव में नोटबंदी को भुनाने की कोशिश में हो लेकिन आंदोलन के नाम पर महज खानापूरी हो रही है। लखनऊ में इस मुद्दे पर प्रदर्शन हुआ तो उसमें प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद व प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर नहीं आए। कानपुर में आरबीआई दफ्तर के बाहर प्रदर्शन भी टालना पड़ा।