यूपी विधानसभा चुनाव के लिए सपा-कांग्रेस का भले ही गठबंधन हो गया हो, लेकिन राहुल गांधी ‘27 साल यूपी बेहाल’ का जवाब नहीं दे पाए। अखिलेश सवालों को घुमाते रहे और राहुल अटकते या विषय से भटकते रहे।
उनका पूरा जोर इस बात पर था कि सपा-कांग्रेस का गठबंधन गंगा-यमुना का संगम है और यह क्रोध व नफरत वाली भाजपा को रोकने और प्रदेश की तरक्की व खुशहाली के लिए किया गया है।
राहुल व अखिलेश रविवार को पहली बार किसी राजनीतिक मंच पर मीडिया से एक साथ रू-ब-रू थे। राहुल से पहला सवाल यही था कि कांग्रेस के ‘27 साल यूपी बेहाल’ के स्लोगन में क्या सपा की चार सरकारों के 13 साल शामिल नहीं थे? इस सवाल ने उन्हें अटका दिया।
सीधा जवाब देने से बचते हुए राहुल बोले, लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में मैंने कहा था कि अखिलेश अच्छा लड़का है। उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। अखिलेश ने पूरी कोशिश की। क्या कांग्रेस अखिलेश की अगुवाई वाली सपा से गठबंधन करना चाहती थी, इसका भी राहुल ने साफ-साफ जवाब नहीं दिया।
अखिलेश से मेरे रिश्ते, दोस्ती अलग है
राहुल ने कहा, अखिलेश से मेरे रिश्ते, दोस्ती अलग है। यूपी के डीएनए में क्रोध, गुस्सा नहीं है। यूपी के युवाओं को नए विकल्प देने, नई तरीके की राजनीति शुरू करने के लिए गठबंधन हुआ है। युवाओं के भविष्य और झूठे वादे करने वाले आरएसएस, भाजपा का मुकाबला करने के लिए हम साथ आए हैं।
अखिलेश की नीयत ठीक, सपोर्ट देना चाहते हैं
राहुल ने कहा कि सरकार चलाने में अखिलेश यादव की नीयत ठीक थी, उन्होंने पूरी कोशिश की। हम उन्हें सपोर्ट देना चाहते हैं। राजनीति नीयत से होती है। आरएसएस-भाजपा की नीयत साफ नहीं है। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार की नीयत भी साफ थी। हर सरकार में कुछ न कमियां रह जाती हैं।
काम बोलता है, लेकिन कोई चूक न रह जाए
पांच साल काम किया है तो कांग्रेस से गठबंधन क्यों? इस पर अखिलेश ने कहा कि काम बोलता है लेकिन ‘यूपी को यह साथ पसंद है’। सब जानते हैं कि हमारे बराबर काम किसी ने नहीं किया है। कहीं कोई चूक न रह जाए, इसलिए कांग्रेस से गठबंधन किया है। हम शत-प्रतिशत आ रहे हैं।
हमारा घोषणा पत्र दिल से, उनका दिमाग से बना
भाजपा के घोषणा पत्र में लुभावने वादों पर अखिलेश ने चुटकी ली। कहा, उनका (भाजपा) घोषणा पत्र दिल से नहीं, दिमाग से बनाया गया है। पूरे घोषणा पत्र में हमारी नकल की गई है। हमने दिल से घोषणा पत्र बनाया है। सब जानते हैं कि हम घोषणा पत्र के सभी वादे पूरे करते हैं।
2019 में गठबंधन के विकल्प खुले
राहुल ने कहा कि हमारा लक्ष्य फासिस्ट संघ-भाजपा की विचारधारा को शिकस्त देना है। अभी 2017 के चुनाव के लिए बात हुई है, लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन तय नहीं है लेकिन विकल्प खुले हुए हैं। क्या राहुल 2019 में पीएम का चेहरा होंगे, इसके जवाब में अखिलेश ने कहा कि इसकी कोई जल्दबाजी नहीं है। मैं सीएम फेस हूं, सीएम का फेस पीएम का फेस नहीं हो सकता।
क्या हम आपको भ्रष्ट, गुंडे लगते हैं
भाजपा द्वारा सपा-कांग्रेस के गठबंधन को गुंडों, भ्रष्टाचारियों का गठबंधन बताने पर अखिलेश ने पलटकर पूछा, हम दोनों आपको क्या लगते हैं?
प्रियंका-डिम्पल के कैंपेन पर नहीं खोले पत्ते
चुनाव में प्रियंका-डिम्पल के कैंपेन पर राहुल ने कहा कि प्रियंका मेरी बहन हैं, उन्होंने हमेशा मदद की है, आगे भी मदद करती रहेंगी। वह कांग्रेस की पूंजी (असेट) हैं। वह चुनाव कैंपेन करेंगी या नहीं, यह फैसला उन्हें ही लेना है। डिम्पल को लेकर यही जवाब अखिलेश ने दिया।
गलत था 1996 में बसपा से गठबंधन
राहुल ने कहा कि 1996 में कांग्रेस का बसपा से गठबंधन करके चुनाव लड़ने का फैसला ठीक नहीं था। उस समय कांग्रेस ने गलती की थी लेकिन आज की स्थिति में सपा से गठबंधन प्रदेश, देश और सपा व कांग्रेस सभी के लिए अच्छा है।
अमेठी, रायबरेली की सीटें छोटा मसला
अमेठी और रायबरेली की सीटों पर सपा व कांग्रेस के बीच फंसे पेच पर राहुल ने कहा कि यह छोटा मसला है। मुख्य मुद्दा गठबंधन के माध्यम से यूपी को बदलने, युवाओं को अवसर देने का है। नोटबंदी के बाद परेशान लोगों को भाजपा से मुक्ति दिलाने का है।
संगम में पता नहीं लगता कहां गंगा-कहां यमुना
सपा-कांग्रेस गठबंधन की जमीनी हकीकत, एक-दूसरे को वोट ट्रांसफर कराने के सवाल पर राहुल ने कहा कि संगम में यह पता नहीं लगता कि कौन-सा पानी गंगा और कौन-सा यमुना का है। इसी तरह कांग्रेस, सपा का पता नहीं लगेगा। गंगा और यमुना के मिलने से प्रगति की सरस्वती निकलेगी।
समझौते में नाराजगी होती है
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राहुल ने कहा कि दो दलों के बीच समझौते की प्रक्रिया में नाराजगी भी चलती है। कभी-कभी गुस्सा भी आता है, इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। गठबंधन में सीटों का लेना-देना होता है। दोनों को ही कंप्रोमाइज करने पड़ते हैं। हम एक साथ आए और एक दिशा में चलेंगे।
अवसरवादी नहीं, दिल का गठबंधन
ये गठबंधन अवसरवादी नहीं है, दिल का गठबंधन है। हम मोदी, आरएसएस और भाजपा को समझाएंगे कि यूपी में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, युवा सब एक हैं। हम प्रदेश को बंटने नहीं देंगे।