रायबरेली जिले में नामांकन 26 अप्रैल से होना है। जिला प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। रायबरेली संसदीय क्षेत्र के रण में सेनाएं जंग के लिए मैदान में हैं, लेकिन बिना प्रत्याशियों के चुनाव का रंग फीका है। भाजपा, कांग्रेस और बसपा ने अब तक पत्ते नहीं खोले हैं। रण में बिना सेनापतियों के ही नेता अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। पूर्व के चुनाव में नामांकन के पहले चुनाव का माहौल हमेशा बना, लेकिन अबकी बार माहौल पूरी तरह से बदला हुआ है। कहीं भी चुनाव जैसा नजारा देखने को नहीं मिल रहा है। सबको सेनापतियों की घोषणा का इंतजार है। प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ही चुनाव का रंग चोखा होने वाला है।
प्रियंका के आने की चर्चा, बिना घोषणा जोश नहीं
सोनिया गांधी के राज्यसभा में जाने के बाद प्रियंका के रायबरेली के रण में सेनापति बनने के चर्चे तो खूब हैं, लेकिन घोषणा अब तक न होने के कारण कार्यकर्ताओं में जोश देखने को नहीं मिल रहा है।
- यूं तो अंदर ही अंदर कांग्रेसी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। सीट को बरकरार रखने के दावे भी कर रहे हैं, लेकिन प्रत्याशी को लेकर कोई मुंह नहीं खोल रहा है। बस यही कहा जा रहा है कि दमदार प्रत्याशी आएगा और काग्रेस का प्रत्याशी ही जीतेगा।
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भाजपा में बस लोकल या बाहरी प्रत्याशी की बहस
भाजपा के कई मंत्री यहां आकर जीत के दावे कर चुके हैं। अबकी हर हाल में कांग्रेस से सीट को हथियाने की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत में आम वोटरों व भाजपाइयों में लोकल या बाहरी प्रत्याशी को उतारने की ही बहस सुनने को मिल रही है। अब तक किसी को भी मैदान में उतारने के संकेत हाईकमान से नहीं मिले हैं। भले ही मनोज पांडेय, दिनेश प्रताप सिंह और अजय अग्रवाल रोजाना आम जनता के बींच पहुंचकर माहौल बनाने में जुटे हैं।
सपा तो कांग्रेस के साथ, पर बसपा के प्रत्याशी का इंतजार
- बसपा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि रायबरेली और अमेठी में अपना प्रत्याशी उतारकर दमदारी से जंग लड़ा जाएगा, लेकिन नामांकन शुरू होने से कुछ दिन पहले तक बसपा ने भी पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि पिछले कई चुनावों को देखा जाए तो बसपा पूरे दम के साथ लड़ी। बसपा के प्रत्याशी टॉप-3 प्रत्याशियों में रहे। सपा इस बार भी कांग्रेस के साथ है। सपा अपना प्रत्याशी अबकी बार भी नहीं उतारेगी।
सभी पार्टियों की बैठकें जारी, बना रहे चुनावी रणनीति
- भाजपा, कांग्रेस व अन्य पार्टियों के नेता माहौल बनाने के लिए बैठकें कर रहे हैं। समर्थकों को जंग के लिए पूरी तरह से तैयार करने के लिए दम भी भर रहे हैं, लेकिन प्रत्याशियों के सवालों पर सभी चुप्पी साधे हैं। हमेशा सबसे पहले प्रत्याशी उतारने वाली कांग्रेस भी इस बार मैदान मारने में पीछे है। हो चाहे जो, इस बार चुनाव रोमांचक होने वाला है। कांग्रेस सीट छोड़ने को राजी नहीं है तो अबकी भाजपा कमल खिलाने में कसर नहीं छोड़ेंगी।