रेडियो टैक्सी के ड्राइवर हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने कम वेतन दिए
जाने का आरोप लगाया है।
वहीं, रेडियो टैक्सी का संचालन करने वाली कंपनी ने
कहा है कि तय शर्तों के अनुसार ही ड्राइवरों को वेतन दिया जा रहा है।
बीते
22 नवंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सेफ राइडिंग हॉस्पिटैलिटी कंपनी
की जिन 53 रेडियो टैक्सी का शुभारंभ किया था, उनके चक्के सोमवार को थम गए।
इस सेवा के ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि उन्हें 10 हजार की बजाय 6000 रुपये
वेतन दिया जा रहा है। वेतन बढ़ाने की मांग कई बार की गई, लेकिन उसे नहीं
माना गया। इसके विरोध में टैक्सी सेवा को बंद करना पड़ा है।
उधर, कंपनी के
निदेशक प्रशांत सिंह का कहना है कि ड्राइवरों को छह हजार रुपये वेतन और
उसके साथ प्रति किलोमीटर के हिसाब से इंसेंटिव देने की बात तय हुई थी।
उन्हें वेतन के अलावा शून्य से 50 किलोमीटर तक गाड़ी चलाने पर एक रुपये
प्रति किमी, 50 से 99 किलोमीटर तक डेढ़ रुपये और 100 किलोमीटर से अधिक दूरी
पर टैक्सी चलाने पर दो रुपये प्रति किलोमीटर का इंसेंटिव मिलना है।
सभी
ड्राइवरों की नियुक्ति अक्तूबर में कर ली गई थी। हालांकि इस महीने रेडियो
टैक्सी का संचालन शुरू नहीं हो सका, इसलिए ड्राइवरों को सात नवंबर को छह
हजार रुपये वेतन दिए गए।
इसके बाद 22 नवंबर को सेवा का शुभारंभ हो गया।
मात्र आठ दिनों के संचालन में वेतन के साथ इंसेंटिव कम बन सका। इस बात को
लेकर कुछ ड्राइवरों ने अपने साथियों को भड़का दिया है।
ड्राइवर अब इंसेंटिव
की जगह 10 हजार रुपये फिक्स सैलरी की मांग कर रहे हैं, जिसे देना मुमकिन
नहीं है।
उधर, इस सेवा के शुरू होने के मात्र 17 दिन बाद बंद होने के कारण
एयरपोर्ट और चारबाग स्टेशन आने वाले यात्रियों को खासी असुविधा का सामना
करना पड़ रहा है।