लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में दवाओं व अन्य सामान की खरीद-फरोख्त के लिए बनाई नई क्रय समिति पर सवाल उठ रहे हैं। इस छह सदस्यीय समिति में फार्मासिस्ट व बाबू भी हैं, जबकि शासनादेश में अध्यक्ष और सीएमओ की ओर से नामित अधिकारी समेत कुल पांच लोगों को कमेटी में शामिल करने के निर्देश हैं। महानिदेशक से मामले की शिकायत हुई है।
अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या ने 19 जनवरी को क्रय समिति का गठन किया। वह इसकी अध्यक्ष हैं। अन्य सदस्यों में सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. एसके पांडेय, सीएमओ की ओर से नामित सदस्य डिप्टी सीएमओ डॉ. निशांत निर्वाण, एमएस व प्रभारी अधिकारी स्टोर डॉ. देवाशीष शुक्ला, चीफ फार्मासिस्ट व फार्मेसी अधिकारी जेके सचान, लेखाकार बाबू श्याम सुंदर कुशवाहा हैं। चीफ फार्मासिस्ट व फार्मेसी अधिकारी और लेखाकार को शासनादेश के विपरीत शामिल करने का आरोप लगा है। शासनादेश है कि निदेशक या अपर निदेशक और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक स्तर के जिला अस्पतालों की क्रय समिति में अध्यक्ष और चार सदस्य (कुल पांच अधिकारी) होने चाहिए।
यह है शासनादेश
वर्ष 2008 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उप्र. के तत्कालीन महानिदेशक एलबी प्रसाद ने शासनादेश का हवाला देते हुए आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया कि जिला अस्पताल या अन्य अस्पताल (जहां निदेशक या अपर निदेशक स्तर के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के पद हैं) वहां की क्रय समिति में अध्यक्ष अस्पताल का निदेशक या प्रमुख अधीक्षक रहेगा। इसके अलावा चार सदस्य होंगे, जो सीएमएस या एमएस, अस्पताल का वरिष्ठतम विशेषज्ञ, प्रभारी चिकित्साधिकारी स्टोर और सीएमओ या उनकी ओर से नामित एक डिप्टी सीएमओ होगा।