यूपी की सरकार द्वारा अभी हाल में बांटे गए यश भारती सम्मान को लेकर लखनऊ के कलाकारों में नाराजगी है। कई वरिष्ठ कलाकारों ने शनिवार को एक मंच पर आकर इसे दिए जाने के तरीके पर आपत्ति जताई।
शास्त्रीय गायक रामेश्वर प्रसाद मिश्र व धर्मनाथ मिश्र, उपशास्त्रीय गायिका सुनीता झिंगरन, तबला वादक इलमास हुसैन, कव्वाली गायक हैदर बख्श, कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह, मुनाल संस्था के निदेशक विक्रम बिष्ट के साथ ही विज्ञान के शिक्षक पीके टंडन ने शनिवार को प्रेस क्लब में एक मंच पर आकर यश भारती पर सवाल उठाए और कहा है कि वरिष्ठता और योगदान को नजरअंदाज किया गया है।
बार-बार सूची जारी किया जाना, गलत नाम आना, आखिरी समय तक नाम जोड़े जाना आदि ने इस पूरी प्रक्रिया को ही संदेह के घेरे में ला दिया है। पत्रकार वार्ता में नहीं पहुंच सके लखनऊ दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक विलायत जाफरी, वरिष्ठ रंगकर्मी व भारतेंदु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने भी कलाकारों के विरोध पर अपनी सहमति जताई है।
चुल्लू भर पानी में डूब मरने जैसा
रामेश्वर मिश्र व एलमास हुसैन
- फोटो : amar ujala
वरिष्ठ शास्त्रीय गायक रामेश्वर प्रसाद मिश्र का कहना है कि हमारे शिष्यों को, छोटे-छोटे लड़कों को यश भारती मिल जा रहा है। यह हमारे लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने जैसा है। मैं 45 सालों से कार्यक्रम कर रहा हूं, देश-विदेश जा रहा हूं, लेकिन बस यही है कि हम सिर्फ अपना काम कर रहे हैं। सत्ता के गलियारों में नहीं जा रहे हैं, इसलिए हमारे नाम की कोई चर्चा नहीं है। जो राजनेताओं के संपर्क में हैं उनका योगदान कम होने पर भी उन्हें यश भारती मिल जा रहा है।
कोई तो मापदंड होना चाहिए
वहीं, वरिष्ठ शास्त्रीय-उपशास्त्रीय गायक धर्मनाथ मिश्र का कहना है कि सरकार का हर क्षेत्र के लोगों को चुनकर सम्मानित करने की भावना अच्छी है, लेकिन इसका कोई मापदंड भी बनाया जाना चाहिए। चयन समिति होनी चाहिए जो वरिष्ठ और कनिष्ठ और उसके योगदान को देखकर फैसला करे। यश भारती का निर्धारण करने वालों को क्या यह नहीं देखना चाहिए कि किस क्षेत्र में कौन, कितने समय से कार्य कर रहा है।
छोटे लोगों को मिलने पर होती है तकलीफ
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार है, लेकिन तकलीफ तब होती है जब इसके चयन में वरिष्ठ और कनिष्ठ का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। अगर आप वरिष्ठ हैं और लंबे समय से साधना कर रहे हैं। साथ ही, आपकी अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठा है, लेकिन आपसे छोटे, कम योगदान वाले आपके ही क्षेत्र के किसी व्यक्ति को पुरस्कार मिल जाता है तो अच्छा नहीं लगता है। यश भारती के लिए चयन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे कलाकारों का निर्धारण सही तरीके से हो सके। - इलमास हुसैन (वरिष्ठ तबला वादक)
सारा दोष चयन प्रक्रिया का
रामेश्वर मिश्र व एलमास हुसैन
- फोटो : amar ujala
शासन की कार्यप्रणाली कुछ ऐसी है कि कभी किसी कलाकार का सम्मान होता है और कभी उसे भुला दिया जाता है। मुझे बेगम अख्तर सम्मान मिला है, लेकिन यश भारती के लिए मेरे नाम पर विचार नहीं हुआ और मुझसे कम उम्र के और कम योगदान वाले गायक-गायिकाओं को सम्मान मिल गया। यश भारती में सम्मान के साथ ही बड़ी राशि भी मिलती है जो बुजुर्ग कलाकारों के लिए अधिक जरूरी है। मेरा तो आवेदन भी न जाने कहां गुम हो गया!
- सुनीता झिंगरन (वरिष्ठ उपशास्त्रीय गायिका)
'47 सालों से कव्वाली गा रहा हूं'
मैं पिछले 47 सालों से कव्वाली के क्षेत्र में लगा हूं। देश-विदेश में कार्यक्रम किया। गरीबी में जीवनयापन किया, लेकिन जो कलाकार केवल अपनी कला में लगे हैं उनकी ओर संस्कृति विभाग या प्रदेश सरकार का ध्यान ही नहीं जाता है। ऐसे कलाकार जो अपनी कला में अव्वल हैं, वे यश भारती से उपेक्षित रह जाते हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हो रहा है। - हैदरबख्श (वरिष्ठ कव्वाल गायक)
वरिष्ठ कलाकारों को प्रमुखता मिले
यह ऐसा सम्मान है कि इसमें उन वरिष्ठ कलाकारों को प्रमुखता मिलनी चाहिए जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनके अब कार्यक्रम कम होते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें सम्मान और आर्थिक सहयोग की अधिक आवश्यकता है, लेकिन उन्हें सम्मान न देकर कई कम योग्य और युवा कलाकारों को सम्मान दिया गया है। इससे वरिष्ठ कलाकारों का मनोबल गिरा है और चयन प्रक्रिया पर सवाल भी उठे हैं। - सुरभि सिंह (युवा कथक नृत्यांगना)
आरटीआई दाखिल कर जानकारी मांगेगी एसोसिएशन
अखिलेश व मुलायम
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश थिएटर एंड फिल्म एसोसिएशन सूचना के अधिकार के तहत चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगेगी। एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक राजवीर रतन ने कहा कि संस्कृति विभाग को कलाकारों के बारे में पता ही नहीं होता है।
सूची में कलाकारों के नाम गलत हो जाते हैं। एक सूची जारी होती है, फिर दूसरी सूची में नाम बदले जाते हैं। मुनाल के निदेशक विक्रम बिष्ट ने कहा कि उचित लोगों को सम्मान न मिलने से इसकी गरिमा कम हो जाती है।
दिवंगत कलाकारों को भी मिले सम्मान
यश भारती सम्मान दिवंगत कलाकारों व साहित्यकारों को भी देने की मांग उठी है। कपिला राज, पं. अर्जुन मिश्र, जुगल किशोर, रवि नागर, सुरेंद्र सैकिया जैसे कलाकारों को भी सम्मान देने की मांग उठाई गई है।
अर्जुन मिश्र के पुत्र युवा कथक नर्तक अनुज मिश्र ने कहा कि मेरे पिता ने जीवन भर कथक की सेवा की, लेकिन उन्हें पुरस्कार नहीं दिया गया। इसी प्रकार, साहित्यकार गोपाल उपाध्याय को सम्मान देने की उनके बेटे हरीश उपाध्याय ने मांग उठाई है।