कर्मचारियों का कहना है कि 10-11 माह पहले जिनका पटल परिवर्तन या स्थानांतरण (वर्ग परिवर्तन) हुआ था, उनका पुनः पटल परिवर्तन या स्थानांतरण कर दिया गया है। जबकि, एक ही वर्ग में 14 वर्ष से तैनात बाबू को नहीं हटाया गया है।
पीडब्ल्यूडी में बाबुओं के तबादलों पर सवाल उठ रहे हैं। इसमें मानकों का पालन न किए जाने के साथ ही वर्षों से जमे बाबुओं का पटल परिवर्तन न करने के आरोप भी हैं। कर्मचारियों ने इस संबंध में पीडब्ल्यूडी मंत्री और प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
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ट्रांसफर के लिए 28 जून को काउंसिलिंग हुई थी, जिसमें कर्मियों से विकल्प लेने की बात कही गई। बताते हैं कि कई जिलों में बाबुओं से कोई विकल्प नहीं लिया गया, लेकिन उनके ट्रांसफर ऑर्डर में विकल्प लेने का जिक्र किया गया है। जिन्हें मुख्यालय से जोन में भेजा गया, उसे भी जारी आदेश में पटल परिवर्तन दिखाया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि 10-11 माह पहले जिनका पटल परिवर्तन या स्थानांतरण (वर्ग परिवर्तन) हुआ था, उनका पुनः पटल परिवर्तन या स्थानांतरण कर दिया गया है। जबकि, एक ही वर्ग में 14 वर्ष से तैनात बाबू को नहीं हटाया गया है। मुख्यालय संवर्ग पर नियुक्त लिपिकीय संवर्ग के ट्रांसफर के मामले में निश्चित मानक तय नहीं किए गए, जिससे तमाम तरह की विसंगतियां सामने आई हैं।
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कर्मचारियों के बीच से मांग उठ रही है कि मुख्यालय के सभी वर्गों में तैनात लिपिकीय कर्मचारियों के सेवा विवरण की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि कौन-कौन कर्मचारी अपने सेवाकाल में अधिकांश समय से एक ही वर्ग में तैनात हैं। कर्मचारियों ने अपने पत्र में यह भी मांग की है कि स्थानांतरण की त्रुटिपूर्ण कार्यवाही के लिए जो भी अधिकारी जिम्मेदार मिलें, उन पर भी कार्रवाई हो। इस बारे में पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष एके जैन का पक्ष जानना चाहा, पर उनसे बात नहीं हो सकी।
पीडब्ल्यूडी में सभी तबादले पूरी पारदर्शिता के साथ हुए हैं। अगर कहीं कोई शिकायत है तो ऐसे हर केस की जांच उच्चस्तरीय कमेटी के जरिये होगी। - अजय चौहान, प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी