दलितों और पिछड़ों को लोकतांत्रिक अधिकार दिलाने में पूना पैक्ट का रोल बेहद अहम रहा है। पूर्व न्यायाधीश जस्टिस खेमकरन ने सोमवार को अंबेडकर महासभा में हुए कार्यक्रम में ये विचार व्यक्त किए।
पूना पैक्ट दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो.राम नरेश चौधरी ने कहा, 1928 में जब भारत में संवैधानिक सुधार के मकसद से साइमन कमीशन आया तो उस समय देश के दलित व पिछड़ों के अत्याचार, उत्पीड़न एवं अन्याय की तरफ उसका ध्यान आकर्षित किया गया।
अंग्रेजों ने बाबा साहब द्वारा पेश किए तथ्यों को सही मानते हुए दलितों को पृथक निर्वाचन प्रणाली यानी दोहरे मत की घोषणा की। इस मौके पर डॉ. लालजी प्रसाद, बीना मौर्या उपस्थित रहे।