लखनऊ। बख्शी का तालाब के उसरना गांव में सौतल झील में अवैध खनन को लेकर शनिवार रात करीब दो सौ ग्रामीणों ने विरोध किया। आरोप है कि खनन माफिया के डंपर चालकों ने ग्रामीणों को रौंदने की कोशिश की। नाराज ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर डंपरों और जेसीबी में तोड़फोड़ की। इटौंजा पुलिस ने चार डंपर और एक जेसीबी को कब्जे में ले लिया है।
उसरना गांव के पास स्थित सौतल झील में तीन गाटा नम्बरों पर खनन की परमीशन थी लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से एक गाटा पर ही परमीशन से अधिक अवैध खनन किया गया। अब जबकि केवल 15 दिन अनुमति के शेष बचे थे तो संस्था ने रॉयल्टी के अधिकार किसी दूसरे को दे दिए जो पिछले कई दिनों से रात में मिट्टी खोद रहे थे। जानकारी होने पर शनिवार रात लगभग दो सौ ग्रामीणों ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो खनन माफिया डंपर और जेसीबी लेकर भागने लगे। ग्रामीणों ने जब उन्हें चारों तरफ से घेर लिया तो ग्रामीणों को रौंदने का प्रयास किया गया। नाराज ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर डंपरों और जेसीबी में तोड़फोड़ की। इटौंजा पुलिस ने चार डंपर और एक जेसीबी को कब्जे में ले लिया है।
आरोप है कि दो माह पहले तीन अप्रैल को उसरना गांव के पास सौतल झील में जब खनन शुरू हुआ तो उसी दिन लगभग ढाई सौ ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से मांग की थी कि यहां पर 15 फीट से अधिक गहरे खनन को रोका जाए। अत्यधिक गहरे खनन की वजह से जमीन से पानी निकलने लगा है जिसमें ग्रामीण और मवेशी गिर जाएंगे और जनहानि की आशंका है। ग्रामीणों का आरोप है तत्कालीन एसडीएम बख्शी का तालाब सिद्वार्थ ने ग्रामीणों और प्रधान से कहा था कि वह सभी आउटर रिंग रोड और सरकारी कार्य में बाधा पैदा कर रहे हैं। इसके लिए प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि गहरे खनन की बिना जांच करवाए ही एसडीएम ने ग्रामीणों पर दबाव बनाया तो ग्रामीण भी पीछे हट गए। इसके बाद खनन माफिया ने मनमानी शुरू कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस सरकारी कार्य के लिए खनन किया जा रहा था, मिट्टी वहां जाने के बजाए 35 सौ रुपये प्रति डम्पर निजी प्लाटिंग को बेची जा रही थी। शनिवार रात ग्रामीणों ने जिस खनन माफिया को पकड़ा, उसने इटौंजा पुलिस के सामने इस बात का खुलासा भी किया।
ट्रांसफर के बाद भी जमे दरोगा की खनन माफिया से डील
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निजी प्लॉटिंग के लिए सौतल झील से मिट्टी खोदवाने वाले सोनू ने इटौंजा पुलिस के सामने ही क्षेत्र के एसआई धीरेन्द्र वर्मा से बात कर हंगामे के बारे में जानकारी दी तो एसआई ने आश्वासन दिया कि वह सब संभाल लेंगे। जबकि इटौंजा से अन्य जगह ट्रांसफर हो चुके एसआई धीरेंद्र वर्मा खुद छुट्टी पर है।
दस ट्रॉली की अनुमति और खोद रहे तीस ट्रॉली
अमानीगंज में धार्मिक कार्य के लिए दस ट्रॉली मिट्टी की अनुमति एक युवक द्वारा ली गयी थी जिसकी आड़ में दस ट्रैक्टर ट्रॉली लगाकर लगभग तीस ट्रॉली मिट्टी खोद डाली गई। जब इसकी सूचना एसडीएम तक पहुंची तो खनन करने वाले अपनी ट्रॉलियां लेकर भाग गए। कपासी गांव में 15 ट्रैक्टर ट्रॉली से अवैध खनन किया जा रहा है। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि लेखपाल रंजीत से इसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन वह गांव नहीं पहुंचे।
लेखपाल ने भेजी रिपोर्ट, कहा- हुआ है खनन अवैध
उसरना लेखपाल अनुज मिश्रा ने इटौंजा पुलिस को भेजी गई रिपोर्ट में बताया है कि सोहेल पुत्र सगीर निवासी बेहटा के अनुसार, शानू निवासी अनवारी फतेहपुर बाराबंकी के कहने पर नगुआमऊ कला अस्ती रोड पर एक निजी प्लॉट के लिए मिट्टी खनन का कार्य किया जा रहा था। लेखपाल ने रिपोर्ट में कहा कि पुलिस की मौजूदगी में एक जेसीबी और तीन डंपर पकड़े गए हैं। यह खनन अवैध है।
अवैध खनन को लेकर हो चुकी हैं कई घटनाएं
अवैध खनन को लेकर यह तोड़फोड़ बवाल की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले जानकीपुरम थाना क्षेत्र में दिगोई निवासी युवक की इसलिए हत्या कर दी गई थी कि उसने दौलतपुर गांव के पास खनन को लेकर विरोध किया था। पिछले माह रामपुर गांव में डंपर निकालने के विरोध में ग्रामीणों ने एक स्कॉर्पियों में तोड़फोड़ की थी। फरवरी में हरदौरपुर गांव के पास आउटर रिंग रोड की मिट्टी लेकर जा रहे डंपर चालक ने एक को रौंद दिया था। अस्ती गांव के पास अवैध खनन के विरोध में ग्रामीणों ने हंगामा और प्रदर्शन कर अवैध खनन को रोकवा दिया था। दो साल पहले शिवपुरी गांव में ग्राम प्रधान और खनन माफिया के बीच हुए संघर्ष में फायरिंग और तोड़फोड़ की घटना हुई थी।