प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित करने की योजना पर कार्यवाही शुरू हो गई है। केंद्र ने देश में 5,000 प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है। पहले चरण में यूपी के 13 शहरों में पीपीपी मॉडल पर ये प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव है। इससे शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
केंद्र के सर्वे में पता चला था कि कानपुर, लखनऊ समेत यूपी के 13 शहरों में रोजाना 200 टन से अधिक शहरी व औद्योगिक कचरा व बायोमास निकलता है। इन्हीं शहरों में सतत योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना है। केंद्र सरकार इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, विश्व बैंक, एडीबी व एसबीआई से विचार कर रही है।
इसमें डवलपर को तकनीकी व वित्तीय सहयोग जैसी व्यवस्था पर निर्णय होना है। प्लांट लगने से शहरों में कूड़े की वजह से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर अंकुश लगेगा। साथ ही कूड़ा कमाई का जरिया बन जाएगा। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव तरुण कुमार ने इस बाबत मुख्य सचिव आरके तिवारी को राज्य स्तर पर संबंधित कार्ययोजना तैयार कराने का आग्रह किया है। इसमें सिंगल विंडो सिस्टम से क्लीयरेंस दिलाने, टैक्स छूट, जैविक खाद की खरीद अनिवार्य करने, प्राथमिकता पर भूमि आवंटन, शुरुआत में लगने वाले बायो गैस प्लांट की स्थापना में आर्थिक प्रोत्साहन देने जैसे कदम शामिल हैं।
इन 13 शहरों में प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव
लखनऊ, कानपुर, नोएडा, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, बरेली, इलाहाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़, मुरादाबाद और सहारनपुर।