लखनऊ। कानपुर के बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की लखनऊ स्थित संपत्ति को सीज कर दिया गया है। परिवारीजनों को तीन महीने का समय दिया गया है। इस दौरान अगर संपत्ति के कागजात लेकर कोर्ट में उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो इसे कुर्क कर दिया जाएगा। विकास दुबे के खिलाफ कानपुर और लखनऊ में कई मुकदमे दर्ज हैं। यह कार्रवाई कानपुर में गैंगस्टर के मुकदमे में की गई है। विकास दुबे पर दो जुलाई 2020 को पुलिस टीम को घेरकर हमला करने का आरोप है। इसमें डिप्टी एसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी।
एसीपी कृष्णानगर पवन कुमार गौतम के मुताबिक, जिलाधिकारी कानपुर ने बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की संपत्तियों को सीज करने का आदेश दिया है। उसकेखिलाफ गैंगस्टर का केस दर्ज है। विकास दुबे का कृष्णानगर के इंद्रलोक कॉलोनी में मकान है। पुलिस ने बृहस्पतिवार दोपहर तीन बजे इंस्पेक्टर कृष्णानगर आलोक राय के नेतृत्व में इस मकान को सीज कर दिया। इस दौरान कॉलोनी में मुनादी भीकराई गई।
बंद था मकान, दीवार फांदकर पहुंची पुलिस
पुलिस टीम जब इंद्रलोक कॉलोनी स्थित विकास दुबे के घर पहुंची तो वहां ताला बंद था। काफी प्रयास करने के बाद भी कोई उत्तर नहीं मिला तो पुलिस व प्रशासन के अधिकारी दूसरे मकान की दीवार फांदकर विकास दुबे के घर में घुसे। अंदर कमरे के दरवाजों पर सील बंदी की। इसके बाद अंदर एक बैनर भी लगाया। फिर बाहर निकलने के बाद मुख्य द्वार को सील किया। इस दौरान पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
दो साल पहले दो जुलाई को हुआ था बिकरू कांड
दो साल पहले 2 जुलाई 2020 की आधी रात 12.45 बजे बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने डीएसपी और एसओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। एक-एक पुलिसकर्मी को दर्जनों गोलियां मारी गई थीं। पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर आठ दिन के भीतर विकास दुबे समेत छह बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। 45 आरोपी जेल में बंद हैं। केस का ट्रायल जारी है। दो जुलाई 2020 की रात चौबेपुर के जादेपुर धस्सा गांव निवासी राहुल तिवारी ने विकास दुबे व उसके साथियों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज कराया था। उसी रात करीब साढ़े बारह बजे तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व में बिकरू गांव में दबिश दी गई। यहां पर पहले से ही विकास दुबे और उसके गुर्गे घात लगाए बैठे थे। घर पर पुलिस को रोकने के लिए जेसीबी लगाई गई थी। पुलिस के पहुंचते ही बदमाशों ने उन पर छतों सेे गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। चंद मिनटों में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर सभी आरोपी फरार हो गए थे।
दूसरे दिन पुलिस ने किया दो का एनकाउंटर
घटना के अगले दिन तीन जुलाई की सुबह सबसे पहले पुलिस ने विकास के रिश्तेदार प्रेम कुमार पांडेय और अतुल दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया। इसके बाद हमीरपुर में अमर दुबे को ढेर किया। इटावा में प्रवीण दुबे मारा गया। पुलिस कस्टडी से भागने पर पनकी में प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय मिश्रा ढेर कर दिया गया। इसके बाद नौ जुलाई की सुबह उज्जैन में विकास दुबे ने फिल्मी अंदाज में सरेंडर किया। एसटीएफ की टीम जब उसको कानपुर लेकर आ रही थी तो सचेंडी थाना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर में विकास दुबे भी ढेर हो गया। एसटीएफ का दावा था कि गाड़ी पलटने की वजह से विकास पिस्टल लूटकर भागा और गोली चलाईं। जवाबी कार्रवाई में मारा गया। बाद में हुए पुलिस और मजिस्ट्रेटी जांच में सभी एनकाउंटर सही ठहराए गए।
अब तक 45 हुए गिरफ्तार, तीन पर रासुका लगा
बिकरू कांड के बाद पुलिस ने 45 आरोपियों को जेल भेजा है। इसमें खुशी समेत चार महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा नौ आरोपी विकास के मददगार और असलहा खरीदने वाले हैं। असलहा खरीदने वाला भिंड के एक सपा नेता का रिश्तेदार था जिसको एसटीएफ ने पकड़ा था। अब तक तीन आरोपियों शिवम दुबे उर्फ दलाल, राजेंद्र और बबलू मुसलान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून भी लगाया गया है।
इन पुलिसकर्मियों की हुई थी मौत
बिकरू कांड में रिटायरमेंट के आठ महीने पहले डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार मिश्रा, एसओ महेश कुमार यादव, दरोगा अनूप कुमार सिंह, दरोगा नेबूलाल, सिपाही जितेंद्र पाल, सुलतान सिंह, बबलू कुमार और राहुल कुमार विकास दुबे के गिरोह के गोलियों के शिकार हुए थे।