हाईकोर्ट ने टीईटी 2011 में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को 72825 सहायक अध्यापकों के पद पर चयन के मामले में ऐसे अभ्यर्थियों को शामिल न करने पर सरकार से जवाब मांगा है, जिनका परिणाम देर से फरवरी और मार्च 2012 में घोषित किया गया था।
यह अभ्यर्थी टीईटी 2011 में शामिल हुए थे, मगर कुछ कारणों से इनका परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हो सका। हाईकोर्ट के आदेश पर बाद में परिणाम घोषित किया गया।
इस दौरान उपरोक्त पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी। अब इन अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आवेदन प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है।
इनका घोषित ही नहीं किया परिणाम
चंद्रशेखर शुक्ला और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने 16 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याची के अधिवक्ता लवलेश शुक्ला के मुताबिक टीईटी 2011 का परिणाम 25 नवंबर 2011 को घोषित किया गया। तमाम ऐसे अभ्यर्थी थे जिनका परिणाम घोषित नहीं किया जा सका।
इन लोगों ने हाईकोर्ट की शरण ली। इस दौरान सरकार ने उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगते हुए 30 नवंबर 2011 को विज्ञापन जारी किया।
इसलिए दाखिल हुई याचिका
आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 दिसंबर 2011 रखी गई। जबकि अभ्यर्थियों का परिणाम मार्च-फरवरी 2012 को घोषित किया गया।
इसकी वजह से यह अभ्यर्थी आवेदन करने से वंचित रह गए। याचीगणों के आवेदन करने के अधिकार का हनन हो रहा है इसलिए याचिका दाखिल की गई है।
शिक्षामित्रों के समायोजन पर भी मांगा जवाब
प्रदेश के करीब पौने दो लाख शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र और प्रदेश सरकार सहित सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है।
इस मामले को पूर्व से दाखिल याचिका के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया है। याचिकाओं पर 21 जुलाई को सुनवाई होगी।
आनंद कुमार यादव और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल सुनवाई कर रहे हैं। याचिका में प्रदेश सरकार द्वारा 19 जून 2014 को जारी शासनादेश को चुनौती दी गई है।
क्या है शासनादेश में?
इस शासनादेश में कहा गया है कि करीब 54 हजार शिक्षामित्रों के बैच का बीटीसी प्रशिक्षण पूरा हो चुका है इसलिए उनको सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने की कार्रवाई प्रारंभ की जाए।
याचिका में कहा गया है कि एनसीटीई और मानव संसाधन मंत्रालय का आदेश है कि सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य योग्यता है।
हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने भी अपने निर्णय में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य योग्यता माना है।
जबकि राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दे दी है। उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है।