उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी ढाई साल हैं, पर कांग्रेस ने अभी से बूथ स्तर पर जाकर काम करने की रणनीति बनाई है। यह भी फैसला किया गया है कि पहले से ही चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाए। ये दोनों जिम्मेदारियां प्रियंका को ही सौंपी जाएंगी। हाईकमान का मानना है कि इससे जहां पुराने कांग्रेसियों की गुटबंदी खत्म होगी, वहीं भाजपा विरोधी मतदाताओं में आशा की एक किरण भी जगेगी।
ये दोनों अहम जिम्मेदारियां दिए जाने की घोषणा से पहले प्रियंका से कहा गया है कि वे यूपी में अपनी सक्रियता बढ़ाएं। हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रतिक्रिया दें। जरूरत पड़ने पर मैदान में उतरकर संघर्ष से भी पीछे नहीं हटें। चाहे फिर गिरफ्तारी ही क्यों न देनी पड़े।
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कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि प्रियंका को आगे लाकर ही प्रदेश के कांग्रेसियों में घर कर गई निराशा को दूर किया जा सकता है। वर्तमान में नेतृत्व पूरी तरह प्रियंका के हाथों में ही है, बस इसकी औपचारिक घोषणा होनी बाकी है।