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यूपी: सीटें 25 हजार पर एडमिशन 429

Sat, 08 Aug 2015 04:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (आरटीई) के तहत राजधानी में 30 बच्चे अब भी दाखिले का इंतजार कर रहे हैं। इनके दाखिलों पर जिला अधिकारी ने मुहर लगा दी है लेकिन, स्कूलों की आनाकानी से मामला लटका हुआ है।
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गुरुवार को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सीएमएस द्वारा गरीब तबके के बच्चों को नि:शुल्क दाखिला देने से मना करने के तर्क को खारिज कर दिया और 13 बच्चों को नि:शुल्क दाखिला देने का निर्देश दिया। इसके बावजूद कई स्कूल गरीब बच्चों को मुफ्त में नहीं पढ़ाना चाहते हैं।

आरटीई पर काम कर रहीं भारत अभ्युदय फाउंडेशन की समीना बानो के अनुसार नि:शुल्क दाखिले के लिए लखनऊ में 25 हजार सीट हैं। इसके बावजूद पांच साल बाद आरटीई के तहत नि:शुल्क दाखिले की संख्या पांच सौ भी नहीं हो पाई है।
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वर्ष 2010 में अधिनियम लागू होने के पांच साल बाद इस साल पहली बार सरकारी स्तर पर आरटीई के तहत नि:शुल्क दाखिलों को लेकर थोड़ी कोशिश हुई। इस साल करीब सात सौ आवेदन आए।

इनमें से 472 आवेदनों को जिला अधिकारी ने दाखिले की अनुमति दी। निजी स्कूलों की ना-नुकुर के बाद इनमें से 429 बच्चों को दाखिला मिल गया। डीएम की अनुमति के बावजूद 43 बच्चों के एडमिशन पर सीएमएस, डीपीएस, एसकेडी, एलपीसी, नवयुग रेडियंस, बेबी मार्टिन, एग्जान मांटेसरी, कॅरिअर कॉवेंट जैसे स्कूल तैयार नहीं थे।

सीएमएस तो एडमिशन के मुद्दे पर हाईकोर्ट तक चल गया। इसके बाद बाकी स्कूल तो मान गए पर नवयुग रेडियंस और बेबी मार्टिन स्कूल अब भी दाखिले में आनाकानी कर रहे हैं।

प्रमाणपत्र की कमी नहीं बनेगी बाधक

राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह के अनुसार आरटीई के तहत नि:शुल्क दाखिले में प्रमाणपत्रों की कमी बाधक नहीं बनेगी। इसके लिए उन्होंने विवि और अन्य शिक्षण संस्थानों से संपर्क किया है।

इन संस्थानों के स्टूडेंट्स को बाल संरक्षण आयोग इंटर्नशिप कराएगा। इस दौरान इंटर्न्स को गरीब अभिभावकों के प्रमाणपत्र आदि बनाने का काम दिया जाएगा। इससे इन अभिभावकों को काफी मदद मिलेगी और उनके बच्चों को नि:शुल्क दाखिला मिल सकेगा।

शासनादेश में बदलाव के लिए लिखेंगे पत्र राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह ने आरटीई के शासनादेश में बदलाव के लिए मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव और शिक्षामंत्री को पत्र लिखने की बात कही है।

उनके अनुसार शासनादेश में कमी होने के कारण ही स्कूल 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला देने से मना कर पा रहे हैं। शासनादेश सटीक और स्पष्ट होगा तो गरीब तबके के बच्चों को आसानी से निजी स्कूलों में दाखिला मिल सकेगा।
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हर स्कूल में 25 फीसदी गरीब बच्चे

आरटीई के अनुसार सभी स्कूलों को उनके यहां की कम से कम 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देनी है। प्रदेश सरकार ने अधिनियम की मंशा के विपरीत जाकर केवल शहरी क्षेत्र के निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला देने संबंधी शासनादेश जारी किया।

इसमें यह भी कहा गया कि सरकारी स्कूलों की सीटें फुल होने के बाद ही निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर दाखिला दिया जाए। यह अधिनियम की मंशा के खिलाफ है। गुरुवार को हाईकोर्ट ने सीएमएस के मामले पर फैसला देते हुए शासनादेश पर फिर से विचार करने के लिए भी कहा।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया,डीआईओएस के पत्र के बाद एसकेडी, एलपीसी सहित कई स्कूल दाखिला देने के लिए तैयार हो गए हैं। अब भी नवयुग रेडियंस और बेबी मार्टिन स्कूल दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। इनसे बात की जा रही है। सीएमएस के साथ ही जल्द ही इन स्कूलों में भी दाखिला दिलाया जाएगा।

सीबीएसई के पूर्व निदेशक डॉ.अशोक गांगुली ने कहा, आरटीई एक्ट अपने आप में पूर्ण है और इसे इसी रूप में लागू करना है।

इसके लिए नियम राज्य सरकार को बनाने हैं। अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि सभी निजी स्कूलों को उनके यहां की 25 प्रतिशत सीट पर गरीब बच्चों को नि:शुल्क दाखिला देना है।

प्रावधान लागू करते हुए इस बात का ध्यान रखना है कि इससे स्कूल के संचालन पर विपरीत प्रभाव न पड़े और बाकी के 75 फीसदी अभिभावकों पर भी अनावश्यक दबाव न पड़े।

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