कोरोना का नाम सुनते ही हर कोई खौफ में आ जाता है। ऐसे में जरा उस परिवार का सोचिए क्या हाल हुआ होगा, जिसकी बेटी की रिपोर्ट निजी पैथोलॉजी की गलती से पॉजिटिव आ गई हो? रायबरेली रोड स्थित सैनिक कॉलोनी निवासी यह परिवार करीब एक सप्ताह तक मानसिक प्रताड़ना से गुजरा है। दहशत में आए परिवार ने तीन दिन तक खाना नहीं बनाया।
सरकारी अस्पताल में जांच के बाद सच्चाई सामने आने में करीब हफ्ता भर गुजर गए। तब तक परिवार ने तमाम मुश्किलें झेलीं। उनकी मुहल्ले में मुंह छिपाने की नौबत तक आ गई। आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या गलत रिपोर्ट देने वाली लैब पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? उस बेटी का पिता अब सबसे यही सवाल पूछ रहा है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने बताया कि 22 वर्षीय बेटी देहरादून से फूड एंड टेक्नोलॉजी में परास्नातक कोर्स कर रही है। होली पर घर लौटी। इसके बाद लॉकडाउन हुआ तो यहीं रुक गई। 20 अप्रैल के आस-पास उसके हाथ के नीचे फुंसी हुई। आलमबाग के निजी अस्पताल में दिखाया, जहां सर्जरी से पहले कोविड जांच की सलाह दी गई। डॉक्टर ने ही निजी पैथोलॉजी का नंबर दिया। कॉरपोरेट स्तर पर काम करने वाली पैथकाइंड पैथोलॉजी के गोमती नगर सेंटर का कर्मचारी 27 को घर पहुंचा। उसने 4500 रुपये लेकर सिर्फ एक नाक से सैंपल लिया।
29 अप्रैल को सीएमओ कार्यालय से परिवार को बेटी के पॉजिटिव होने की सूचना मिली। इसके बाद 30 अप्रैल को सीएमओ ऑफिस की टीम घर पहुंची और परिवार के पांचों सदस्यों के सैंपल ले गई। अगले दिन बताया गया कि रिपोर्ट निगेटिव है। एक मई को पूरे मोहल्ले में पॉजिटिव मरीज मिलने को लेकर हलचल मच गई। शाम को सीएमओ कार्यालय से फोन कर बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों की बैठक हुई है, जिसमें बेटी को पॉजिटिव माना गया है।
दोपहर दो बजे एंबुलेंस पहुंची और उसे केजीएमयू ले गए। दो मई को सैंपल लिया और तीन मई को 11 बजे निगेटिव बताया गया। इसके बाद घर में क्वारंटीन रहने की सलाह देकर डिस्चार्ज कर दिया गया। इसी तरह एक अन्य मरीज की रिपोर्ट भी निजी पैथोलॉजी ने पॉजिटिव बताई थी, जो केजीएमयू की जांच में निगेटिव मिला। गोमती नगर निवासी यह मरीज गंभीर है और पीजीआई में भर्ती है। उसका अन्य बीमारियों का इलाज चल रहा है। सैनिक विहार निवासी परिवार की तरह यह परिवार भी मानसिक यातना झेल चुका है।
बेटी के पिता के ये भी सवाल
- लैब ने 4500 रुपये लिए और रसीद तक नहीं दी। आखिर क्यों?
- लैब से पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आज तक नहीं दी गई। इसकी वजह क्या है?
- जब दोबारा जांच में बेटी निगेटिव पाई गई तो संबंधित लैब के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई हुई?
- पूरा परिवार और सैनिक विहार कॉलोनी के लोग दहशत में रहे। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
दिशा-निर्देश पर होगी कार्रवाई
उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत करा दिया है। दिशा-निर्देश के हिसाब से कार्रवाई होगी। सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत और आईसीएमआर की ओर से स्वीकृति लेने वाली लैब जांच कर सकती है। राजधानी में अभी तक एक निजी लैब को ही जांच के लिए अधिकृत किया गया है। इसके अलावा कारपोरेट लैब को प्रदेश स्तर पर जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
जल्द की जाएगी कार्रवाई
सीएमओ कार्यालय से पैथोलॉजी के संबंध में रिपोर्ट मिली है। उसका परीक्षा कराया जा रहा है। कोविड 19 के संबंध में आईसीएमआर की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन हो रहा है या नहीं, यह भी दिखाया जा रहा है। पूरे मामले में जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
अभिषेक प्रकाश डीएम लखनऊ।
दहशत में न आएं
यदि आपके आस-पास कोई पॉजिटिव मिलता है तो उससे दहशत में न रहें। परिवार के साथ दुर्व्यवहार न करें और उसे मानसिक तनाव न दें। उनके साथ सहानुभूति रखें, क्योंकि यह किसी भी परिवार में हो सकता है। उन्हें फोन कर भरोसा दें कि हिम्मत रखें। उनकी जरूरत का सामान घर तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाने का प्रयास करें।
- डॉ. आदर्श त्रिपाठी, मानसिक रोग विशेषज्ञ, केजीएमयू
सावधानी बरतें
किसी परिवार में पॉजीटिव मरीज है तो उसका तिरस्कार न करें। खुद सावधानी बरतें और उन्हें भी ऐसा करने को कहें। मोहल्ले में निकलें तो मास्क लगाएं। मरीज के परिवार के लोग घर में क्वारंटीन रहें। किसी तरह की दिक्कत हो तो डॉक्टर अथवा स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूप में सूचना दें। आसपास के किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिखते हैं तो अस्पताल में भर्ती कराएं। छुपाने से समस्या बढ़ सकती है।
डॉ. डी हिमांशु, प्रभारी सक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट, केजीएमयू