लॉकडाउन में पीलीभीत के टाइगर रिजर्व से बाहर मौजूद बाघ को पकड़ने के दौरान उसकी मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह आरोप लग रहे हैं कि वन अधिकारियों ने अति उत्साह में बाघ को ट्रैंकुलाइजर की अधिक डोज दे दी जिससे उसकी मौत हो गई, वहीं वन विभाग बाघ की मौत की वजह ग्रामीणों के हमले से घायल होने को बता रहे हैं। हालांकि जांच शुरू हो गई है। प्रमुख सचिव वन सुधीर कुमार गर्ग ने इसकी पुष्टि की है।
बाघ के मरने पर मामले की लीपापोती शुरू हो गई और उसका सामान्य पोस्टमार्टम करने की तैयारी थी। लेकिन इसकी जानकारी पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने प्रमुख सचिव वन से शिकायत कर संबंधित डीएफओ को निलंबित कर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग कर दी। इसके बाद बाघ के शव का बरेली स्थित इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) में पोस्टमार्टम कराया गया।
आईवीआरआई के निदेशक आरके सिंह से जब इस मामले में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इतना ही पता है कि बाघ की मौत ट्रॉमा की वजह से हुई। वहीं, बाघ का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर अभिजीत पावडा ने कहा कि बाघ की एक पसली टूटी थी, पेट में खून जमा हो गया था और उसकी किडनी खराब थी। उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया कि बाघ की मौत नशे के ओवरडोज से हुई अथवा नहीं।