राजधानी में ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में कोरोना मरीजों को इससे बचाने के लिए एंटी फंगल दवाएं दी जा रही हैं, लेकिन निजी अस्पतालों में इनका खूब इस्तेमाल हो रहा है।
बाइपैप पर रहने वाले मरीजों को भी एंटी फंगल डोज दी जा रही है, जबकि सरकारी संस्थानों में जिन मरीजों में फंगल की स्थिति बन रही है या जो आईसीयू व वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, सिर्फ उन्हें ये दवाएं दी जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि बेवजह एंटी फंगल दवाएं देना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तो है ही, इससे बाद में फंगस आने पर मरीज पर दवाएं बेअसर हो जाएंगी।
कोरोना के गंभीर मरीजों को स्टेरॉयड दवा दी जाती है। साथ ही इन्हें आईसीयू और ऑक्सीजन पर रखा जाता है। इस परिस्थिति में इनके ब्लैक फंगस की चपेट में आने की आशंका रहती है।
जिनमें शुगर काबू नहीं रहता, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट समेत असाध्य रोग वाले मरीजों पर भी इसका खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में निजी सेंटर में भर्ती मरीजों को एंटी फंगल दवाएं अधिक लगाई जा रही हैं।
इससे मरीजों में ड्रग रेजिस्टेंस की स्थिति सामने आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मरीजों में किसी तरह के फंगल इंफेक्शन की स्थिति बन रही है उन्हें ही यह दी जानी चाहिए। बेवजह दवा देने से मरीज की सेहत को खतरा हो सकता है।
बेवजह अन्य मरीजों को दवा नहीं चलाई जाती
लोहिया, चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि संस्थान में छह ब्लैक फंगस के मरीजों पर एंटी फंगल दवा चल रही है। कुछ बहुत पुराने मरीज जो वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए ये दवा दी जा रही है। बेवजह अन्य मरीजों को दवा नहीं चलाई जाती है।
सामान्य मरीजों को कोई भी एंटी फंगल दवा नहीं दी जा रही
केजीएमयू प्रवक्त, डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस के मरीजों को ही एंटी फंगल दवा दी जा रही है। कोविड के सामान्य मरीजों को कोई भी एंटी फंगल दवा नहीं दी जा रही है।
40 से अधिक मरीज वेंटिलेटर व बाईपैप पर
चंदन हॉस्पिटल के डॉ. फारूख ने बताया कि बाइपैप पर भर्ती मरीजों को एंटी फंगल की सामान्य दवा दी जाती है, ताकि संक्रमण से बचाया जा सके। 40 से अधिक मरीज वेंटिलेटर व बाईपैप पर हैं। इन्हें एंटी फंगल की दवा की डोज दी जा रही है।
किसी भी तरह से संक्रमण से बचाना
कैरियर हॉस्पिटल के अफसार सिद्दीकी का कहना है कि आईसीयू में भर्ती मरीजों को एंटी फंगल दवा दी जा रही है। इसका कारण उन्हें किसी भी तरह से संक्रमण से बचाना है।
नहीं दी जा रही डोज
एरा मेडिकल कॉलेज, प्रिंसिपल, डॉ. एमएमए फरीदी का कहना है कि संस्थान में ब्लैक फंगस के दो मरीज भर्ती हुए थे। इन्हें एंटी फंगल इंजेक्शन दिए जा रहे थे। बाकी किसी मरीज को इसकी डोज नहीं दी जा रही है।
अस्पताल वेंटिलेटर पर मरीज ब्लैक फंगस के मरीज एंटी फंगल डोज
केजीमएयू 448 73 70-80
चंदन 40 15 40-50
कैरियर हॉस्पिटल 06 00 10-12
एरा 15 02 02
लोकबंधु 04 00 00
लोहिया संस्थान 53 06 10
एंटी फंगल इंजेक्शन न पहुंचने से तीमारदार परेशान
कोरोना संक्रमण से उबरने वाले ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) की चपेट में आ रहे हैं। ब्लैक फंगस के मरीजों को दवा मिले, इसकी जिम्मेदारी रेडक्रॉस सोसाइटी को दी गई है। रेडक्रॉस में एंटी फंगल इंजेक्शन न पहुंचने से तीमारदार बृहस्पतिवार को दिनभर सोसाइटी कार्यालय के चक्कर लगाते रहे।
सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं निजी अस्पतालों में भर्ती पॉजिटिव मरीज रेडक्रॉस से इंजेक्शन ले सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को इंजेक्शन तो वहीं लग जाएगा, पर निजी अस्पतालों के मरीजों की समस्या का निस्तारण रेडक्रॉस करेगा। एक मरीज को एक दिन में छह इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए रेडक्रॉस को तीन दिनों के लिए 18 इंजेक्शन दिए जाएंगे। इंजेक्शन प्राप्त करने के लिए मरीज को अपर आयुक्त प्रशासन से पत्र लिखवाना होगा।
अभी नहीं आए इंजेक्शन
रेडक्रॉस सोसाइटी के अरविंद पाठक ने बताया कि अभी तक एंटी फंगल इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हुई है। इससे लोगों को इंजेक्शन नहीं दिए जा पा रहे हैं। बताया कि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बाजार से दवा खरीदनी होगी। बाजार में नहीं मिलने पर मंडलायुक्त एवं अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एडी हेल्थ) को आवेदन कर मांग करेंगे। मंडलायुक्त, एडी हेल्थ एवं राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य द्वारा नामित तीन सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम जरूरत का आंकलन करेगी। संस्तुति पर तीन दिन की डोज दी जाएगी। उन्होंने उम्मीद जतायी कि शुक्रवार दोपहर तक इंजेक्शन की आपूर्ति हो जाएगी।