एक तरफ पुलिस ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराया था। लेकिन उनको पकड़ नहीं सकी। पुलिस की लापरवाही ऐसी थी कि कोई भी सवाल खड़ा कर सकता था। करीब 25 दिनों तक अजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के आरोपी पूर्व सांसद धनंजय सिंह जेल में बंद थे। इस दौरान लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने यह भी प्रयास नहीं किया कि वारंट बी के जरिए उनको लखनऊ जेल लाकर पूछताछ किया जा सके। पुलिस की यह कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
हालांकि अपनी इस लापरवाही की लीपापोती में पुलिस ने लखनऊ से लेकर जौनपुर तक ताबड़तोड़ कई जगह दबिश दी। दबिश भी देखकर साफ लग रहा था कि सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है। सैकड़ों की संख्या में पूर्व सांसद के जौनपुर आवास पहुंचे पुलिसकर्मियों ने सिर्फ उनकी पत्नी से पूछताछ की। इसके बाद वापस चले आए। हालांकि उनकी पत्नी ने जिला पंचायत सदस्य के लिए नामाकंन भी उसी दिन किया था।
मुस्तफा व तोमर के बयान के आधार पर नामजद हुआ सुनील राठी
प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक इस वारदात को अंजाम देने के लिए पूर्वांचल व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई गिरोह लगे थे। पूर्व सांसद धनंजय सिंह का करीबी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माफिया सुनील राठी जो इस समय बागपत जेल में बंद है। उस पर मुन्ना बजरंगी के हत्या का आरोप भी है। उसने इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए अपने दो शूटर दिये थे। इसमें मुस्तफा उर्फ बंटी और राजेश तोमर उर्फ जय शामिल हैं। पुलिस की गिरफ्त में दोनों शूटर है।
मुस्तफा ने पुलिस के सामने कुबूल किया था उसे और राजेश तोमर को सुनील राठी ने ही भेजा था। उनको सिर्फ इतना बताया गया था कि लखनऊ में गिरधारी उर्फ कन्हैया मिलेगा। वह अजीत की पहचान करायेगा। काम पूरा करना है। खर्चे की चिंता न करना। जो भी होगा समय से मिलता रहेगा। इसके बाद पुलिस ने राजेश तोमर से पूछताछ की। जिसमें मुस्तफा की बातें पुष्ट हो गई। पुलिस ने सुनील राठी को भी अपने मुकदमें में आरोपी बना लिया। उस पर भी साजिश रचने का आरोप है।
अजीत सिंह (बायें) व घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मी।
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प्रभारी निरीक्षक चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक अजीत सिंह हत्याकांड में पूर्वांचल के कई गिरोह शामिल थे। इसमें आजमगढ़ के कुंटू सिंह, अखंड सिंह का नाम प्रमुख है। वहीं इन सभी ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह का सहयोग लिया। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सुनील राठी ने भी इनकी भरपूर मदद की। वहीं इस हत्याकांड में एक अन्य शूटर कुणाल भी शामिल था। जो राजस्थान के लॉरेंस विश्नोई गिरोह का सदस्य है। वह भी इस हत्याकांड में शामिल शूटरों की मदद करने में शामिल रहा। पुलिस के मुताबिक कुणाल विश्नोई गिरोह के लिए काम करता था। वह भी शॉर्प शूटर है। लेकिन इस हत्याकांड में उसने घायल शूटर राजेश तोमर का इलाज कराने और लखनऊ से लेकर दिल्ली पहुंचाने तक पूरी सहायता की। पुलिस इस मामले में उसको तलाश रही है। एक टीम जल्द ही राजस्थान के लिए रवाना होगी।
पूर्व सांसद सहित 6 की तलाश
प्रभारी निरीक्षक चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक अजीत सिंह हत्याकांड में पूर्व सांसद धनंजय सिंह सहित 6 आरोपियों की तलाश की जा रही है। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माफिया सुनील राठी बागपत जेल में बंद है। जल्द ही उसे वारंट बी के जरिए लखनऊ लाया जाएगा। वहीं पूर्व सांसद धनंजय सिंह, उनके करीबी विपुल सिंह, रवि यादव, प्रदीप सिंह कबूतरा, कुणाल फरार है। पुलिस उनकी तलाश में लगी है। पुलिस इन सभी आरोपियों को भगोड़ा घोषित करने के लिए कोर्ट में सोमवार को अर्जी डालेगी। इसके बाद कोर्ट का आदेश मिलते ही सभी के घर के सामने डुगडुगी बजवाकर नोटिस चस्पा करेगी।