छोटे शहरों की क्या बात करें, प्रदेश की राजधानी खुद बाल विवाह का कलंक ढो रही है। लॉकडाउन का फायदा उठाकर मई और जून में 14 बच्चियों की शादी रचाने की तैयारी थी। इनमें से 11 शादियां रुकवाने में तो चाइल्ड लाइन, जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) और बाल कल्याण समिति की टीम सफल रही, लेकिन तीन शादियां परिवारवाले धोखा देकर करने में सफल रहे।
ताजा मामला सोमवार का है। माल में एक शादी गुपचुप तरीके से हो गई, जबकि डालीगंज में टीम के सही समय पर पहुंच जाने से विवाह रुक गया। सीडब्ल्यूसी परिवारवालों के खिलाफ केस दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। डीपीओ सुधाकर शरण पांडेय का कहना है माल से बराबर सूचनाएं मिल रही हैं। जल्द ही वहां वृहद जागरूकता अभियान चलाएंगे।
टीम पहुंचने से पहले निपटाई शादी, इंस्पेक्टर बोले-जानकारी नहीं
सीडब्ल्यूसी की सदस्य डॉ. संगीता शर्मा ने बताया कि रविवार रात को सूचना मिली थी कि माल में आम मंडी के पास एक बच्ची की शादी सोमवार को होनी है। सुबह चाइल्ड लाइन व डीसीपीयू की टीम पहुंची, साथ में स्थानीय पुलिस भी थी, लेकिन तब तक शादी हो चुकी थी। वहीं, इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि मुझे इस शादी की कोई जानकारी नहीं है।
पढ़ना चाहती है छात्रा, 15 साल बड़े से रचा रहे थे शादी
माल पहुंची चाइल्डलाइन और डीसीपीयू की टीम जानकारी लेते हुए।
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रविवार को ही डालीगंज में एक विवाह की सूचना थी। टीम ने सोमवार को जाकर शादी रोकने को कहा और सीडब्ल्यूसी ने माता-पिता को तलब किया। अंबेडकरनगर में संविदाकर्मी पिता व अन्य से लिखित में लिया कि वे लड़की की शादी 18 साल के बाद ही करेंगे। कक्षा नौ में पढ़ रही बच्ची की 15 साल बड़े लड़के से शादी होनी थी। बच्ची ने बताया कि वह अच्छे नंबरों से पास होती है और आगे पढ़ना चाहती है।
माल से सबसे ज्यादा शिकायतें
डॉ. संगीता शर्मा ने बताया कि जून में ऐसे नौ मामले आए। इनमें से माल के पांच, दो काकोरी, एक गोमतीनगर, एक डालीगंज का है। मई में पांच शिकायतें मिलीं, जिनमें दो माल, एक काकोरी, एक बीकेटी और एक सीतापुर की थीं।
कोरोना काल में बढ़े मामले
कोरोना काल में ऐसे मामले बढ़े हैं। कारण है कि लॉकडाउन में एनजीओ और नागरिक समाज भी सक्रिय नहीं हैं। आयोग ऐसे मामलों का संज्ञान लेकर जिम्मेदारी तय करेगा। साथ ही सरकार को भी अवगत कराएगा। - डॉ. विशेष गुप्ता, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग