प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राम नरेश यादव ने बताया कि पीआरडी विभाग का गठन 1935 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की अगुवाई में हुआ था। सन 1957 तक पीआरडी विभागों को थानों की कमान संभालने का दायित्व मिलने के साथ ही पुलिस बी का दर्जा मिला था।
उन्होंने बताया कि उस समय 14 पद थे। इसमें 9 पद का स्थायीकरण कर दिया लेकिन पांच पद ब्लाक कमांडर, हल्का सरदार, दलपत, टोली नायक, रक्षक को छोड़ दिया गया। उन्होंने बचे पदों को नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।
महामंत्री रामा प्रसाद तिवारी ने कहा कि साल 2016 में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर झूलेलाल पार्क में पीआरडी जवानों को नियमिति करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि 26 मार्च 2017 को सरकार बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने जीडीए सभागार में भी मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया लेकिन अभी तक उसे पूरा नही किया गया।
-होमगार्ड के समान सुविधाएं, नियमित डयूटी, भत्ता।
-जवानों को नियमित करना।
-पीआरडी विभाग को युवा कल्याण से अलग कर विभागाध्यक्ष आईपीएस अधिकारी बनाया जाए।
-60 साल सेवा से के बाद पेंशन व्यवस्था या एकमुश्त धनराशि दिलाई जाए।
-पीआरडी जवानों को थानों व चौकियों पर ट्रैफिक व रेलवे और डायल 100 आदि में लगाया जाए।