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संघर्ष, समाज और सिनेमा ने दी नई दिशा, तराशी जिंदगी

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संघर्ष, समाज और सिनेमा ने दी नई दिशा, तराशी जिंदगी
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मशहूर निर्देशक प्रकाश झा जीवन से जुड़े संघर्षों को किया बयां
दामुल, परिणति, मृत्यदंड, गंगाजल, अपहरण, राजनीति, चक्रव्यूह, सत्याग्रह... ये उन फिल्मों के नाम हैं, जिनमें औरतों और हाशिए के समाज, जाति जैसे मुद्दों को बेहतरीन ढंग से उठाया गया है। इन फिल्मों को डायरेक्ट करने वाले मशहूर निर्देशक प्रकाश झा रविवार को एक होटल में आयोजित निजी कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। जहां लेखक यतीन्द्र मिश्र के साथ संवाद में उन्होंने अपने बचपन, परिवार, संघर्ष और फिल्मों के सफर को बेहद साफगोई से साझा किया।
प्रकाश झा ने बताया वह हजारीबाग जिले के झुमरीतलैया के रहने वाले हैं। लोग तो विश्वास ही नहीं करते थे कि ऐसी भी कोई जगह है। सैनिक स्कूल से पढ़ाई की और उस दौरान हफ्ते में एक फिल्म दिखाई जाती थी, वो भी अंग्रेजी। हम लोग हिंदी फिल्म देखने के लिए नौ किलोमीटर दूर कोडरमा तक जाते थे। निर्देशक ने बताया कि सोलह से 25 साल की उम्र में मैंने जो संघर्ष किया, उसने ही मेरी जिंदगी को तराश दिया। कार्यक्रम के दौरान गायिका मालिनी अवस्थी ने भी निर्देशक के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
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300 रुपये लेकर निकला था मुंबई
बात 1972 की है। उस वक्त मेरी उम्र कोई साढ़े सोलह साल की रही होगी। चूंकि मुझे पढ़ाई नहीं करनी थी, इसलिए मैं 300 रुपये लेकर घर से मुंबई निकल गया। नेशनल डिफेंस एकेडमी में भी मेरा सेलेक्शन हो गया था, पर आर्मी में जाने का मन नहीं था। जैसे तैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। पिताजी बोले, चलो आर्मी नहीं तो आईएएस ही बन जाएगा। मैं और भी घबरा गया था, इसलिए मुंबई भाग गया और यकीन मानिए मेरे जीवन को वो पांच साल रोमांच और संघर्ष से भरपूर थे।
गुजरातियों को मुंबई में सिखाता था अंग्रेजी
मुंबई में संघर्ष के दौरान मैंने बहुत से छोटे छोटे काम किए। गुजरातियों को अंग्रेजी सिखाई। राजा राम जी के यहां मैं रहता था और यहीं पर आगा जानी साहब से मुलाकात हुई। उनके साथ धर्मा का शूट देखने के लिए गया। यहां मैंने उनसे कहा, मुझे डायरेक्टर बनना है। मैं पुणे फिल्म संस्थान पहुंच गया। पर मैं ग्रेजुएट नहीं था, जिसके बाद मैंने रेस्टॉरेंट में भी काम किया। ड्यूटी किचेन में थी तो खाना बनाना भी सीख लिया। नसीरूदीन, केतन मेहता, ओमपुरी के साथ डाक्यूमेंट्री एडिटिंग सीखी। गिरीश कर्नाड हमारे टीचर थे।
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मेरी फिल्म ने उड़ाई राज कपूर की नींद
प्रकाश झा ने कहा कि परिणति फिल्म को देखने के बाद एक दिन राज कपूर साहब ने मुझे फोन किया और कहा तुम्हारे साथ फिल्म बनानी है। उन्होंने मुझे घर पर बुलाया। जब मैं वहां पहुंचा तो उन्होंने कहा कि कैसी फिल्म बनाई है, जिसने मेरी नींद उड़ा दी है। प्रकाश झा ने बताया, मुझे संगीत का भी शौक है। आजकल पियानो सीख रहा हूं।
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