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राजधानी के 44.5 फीसदी बच्चों का वजन कम

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राजधानी के 44.5% बच्चों का वजन कम
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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों में खुलासा, उम्र के हिसाब से लंबाई भी है कम
राजधानी में पांच साल की उम्र वाले बच्चों में 44.5 फीसदी का वजन उनकी आयु के अनुसार कम है। इसमें करीब 37.5 फीसदी बच्चों की लंबाई भी उनकी आयु के अनुसार कम है। यह खुलासा हुआ है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 4 के आंकड़ों में। इन बच्चों को कुपोषण की श्रेणी में मानते हुए स्वास्थ्य विभाग पोषित करने में जुटा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राजधानी के 33.6 फीसदी बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुसार कम है। इसी तरह 17.9 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुपात में बहुत कम है। इसी तरह गर्भवती महिलाओं की बात करें तो 15 से 49 वर्ष तक की 59.4 फीसदी महिलाएं खून की कमी से ग्रस्त हैं। इसी तरह 6 माह से 59 माह तक के 72 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी पाई गई है। हालांकि राजधानी का आंकड़ा पूरे प्रदेश की स्थिति से बेहतर बताया जा रहा है। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि आयु के अनुसार कम वजन वाले बच्चों की स्थिति प्रदेश में 46 फीसदी है, जबकि लखनऊ में यह करीब तीन फीसदी कम है। इसी को ध्यान में रखकर पोषण अभियान चलाया जा रहा है।
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लखनऊ के समेकित बाल विकास सर्विस के जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे ने बताया कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन, आंवला, बथुआ सहित अन्य पौधे लगवाए जा रहे हैं। बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पोषण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अगली सर्वे रिपोर्ट में राजधानी की स्थिति बेहतर होगी।
ये है सामान्य वजन व लंबाई
पांच साल के लड़के का वजन 18 किलो और लड़की का 17 कि लो होना चाहिए। जबकि लंबाई औसतन 40 से 42 इंच होनी चाहिए।
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