कचरे के ढेर से मूर्तियां इकट्ठी करते प्रहलाद
- फोटो : अमर उजाला
उन्हें पहचानने वाले जानते हैं कि वह कचरे के ढेर में पड़ी देव प्रतिमाओं को भी उठाकर ले जाएंगे और सम्मान पूर्वक विसर्जित कर देंगे। पिछले 12 साल से इस काम में जुटे प्रह्लाद अब लखनऊ के गणपति बप्पा मूर्ति उठाओ अभियान के सक्रिय सदस्य भी हैं।
वह बताते हैं कि जब मैं किशोरावस्था से गुजर रहा था तो कई बार देखता कि सड़क के किनारे लोग देव प्रतिमाओं को कचरे में फेंक जाते हैं। इससे मन को गहरी पीड़ा होती, लेकिन कुछ रास्ता नहीं सूझ रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों को देखा कि वह ऐसी प्रतिमाओं को नदी में ले जाकर प्रवाहित कर रहे हैं तो मुझे भी ऐसा करना उचित लगा।
अब हर रविवार को फावड़ा लेकर घर से निकलता हूं, जहां भी देव प्रतिमाएं ऐसी हालत में मिलती हैं उन्हें उठाकर झूलेलाल पार्क के पास गोमती में बने गड्ढे में जाकर विसर्जित कर देता हूं। मूर्तियों के साथ जो माला या धातु मिलती है उसे निकालकर मंदिरों में दे देता हूं। गोमती में इस उद्देश्य से दो स्थानों पर गड्ढे भी बनाए गए हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय से ही एलएलबी की शिक्षा हासिल करने वाले प्रह्लाद सिंह बताते हैं कि वह मूल तौर पर बिहार के निवासी हैं, लेकिन उनका जन्म और परवरिश लखनऊ में ही हुई है। पिता और भाई के साथ संयुक्त परिवार में रहते हुए उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि देव प्रतिमाओं को विसर्जित करने के काम में वक्त की कमी आड़े आई हो। मूर्तियों का विसर्जन करने का काम करने के दौरान ही कई लोग मिले, जिन्होंने इसकी सराहना की।
मनकामेश्वर वार्ड के पूर्व पार्षद रंजीत सिंह ने बताया कि यह काम पर्यावरण की रक्षा से भी जुड़ा है। उनके साथ ही गणपति बप्पा मूर्ति उठाओ अभियान से जुड़ गया। इलाके में लोगों को अपना मोबाइल नंबर भी दे रखा है कि अगर कहीं मूर्तियों को असम्मानजनक तरीके से पड़ा देखें तो हमें बताएं।