फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिजली निगमों का निजीकरण: सपा सरकार में भी लागू नहीं हो पाया था पीपीपी मॉडल, पांच शहरों के लिए था प्रस्ताव

Wed, 27 Nov 2024 12:29 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

बिजली निगमों के निजीकरण के लिए लाया गया प्रस्ताव सपा सरकार में भी विरोध के चलते लागू नहीं हो पाया था। हालांकि, तब से ये प्रस्ताव पांच शहरों के लिए लाया गया था।
 
विज्ञापन
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश में विद्युत निगमों को लेकर पीपीपी मॉडल पर चलाने का प्रस्ताव सपा सरकार के कार्यकाल में भी लाया गया था, लेकिन अभियंताओं के विरोध की वजह से लागू नहीं किया जा सका था। तब पांच शहरों के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था।
विज्ञापन


पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कॉर्पोरेशन प्रबंधन के सामने आरोप लगाया कि एमओयू करते वक्त प्रबंधन ने घाटे को नजरअंदाज किया। यही वजह है कि साल दर साल घाटा बढ़ता गया।

ये भी पढ़ें - प्रदेश में पान मसाला उत्पादन हुआ ठप, इकाइयों के बाहर 60 से ज्यादा टीमें तैनात, 24 घंटे निगरानी
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - कर्ज में डूबे युवक ने 11 साल के बच्चे को अगवा कर पांच लाख की फिरौती मांगी, नहीं दी तो कर दी हत्या
विज्ञापन


उन्होंने उदाहरण दिया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना करीब 18 हजार करोड़ की थी, जिसका टेंडर 27 हजार करोड़ से अधिक का किया गया। ऐसे में नौ हजार करोड़ रुपये का गैप ही भविष्य में घाटा बढ़ाएगा।

इसी प्रकार से उदय और पावर फॉर ऑल योजना में भी गलत नीतियों की वजह से राजस्व घाटे में बढ़ोतरी हुई। कॉर्पोरेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने कंपनियों की बैक गारंटी 10 फीसदी से घटाकर तीन फीसदी कर दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें