- जहां वर्टिकल व्यवस्था है, उसे खत्म किया जाए। सिर्फ 1912 के भरोसे बैठने के बजाय लाइनमैन से लेकर मुख्य अभियंता तक को कटौती के लिए जिम्मेदार बनाया जाए। स्वीकृत भार और संसाधनों के बीच गैप को खत्म किया जाए।
- अभियंताओं का निलंबन रद्द किया जाए अथवा निलंबन अवधि में भी उन्हें बिजली आपूर्ति की व्यवस्था में लगाया जाए।
- गर्मी को विभाग के लिए युद्ध स्तर का माना जाता है। पहले तबादला सीजन सर्दी में होता था। ऐसे में संविदा कर्मियों की छंटनी बंद की जाए। (जैसा कि बिजली विभाग के अभियंताओं ने बताया)
कटौती का अंकगणित: एक मुख्य अभियंता ने ग्रामीण इलाके की चर्चा की। कहा, यहां 18 घंटे का रोस्टर है। यदि उत्तर प्रदेश लोड डिस्पैच सेंटर से कोड भेज कर तीन घंटे की कटौती की गई तो 15 घंटे बचा। उसमें तीन बार लोकल फाल्ट हुआ और उसे ठीक करने में तीन घंटे लगे तो सिर्फ 12 घंटे बचे। ग्रामीण इलाके में यह कटौती इसलिए भी ज्यादा होती है कि वहां हो हल्ला कम है। राजस्व भी ग्रामीण इलाके से कम मिलता है। ऐसे में कटौती के लिए इसी क्षेत्र का चुनाव किया जाता है। शहरी क्षेत्र में कटौती लोकल फाल्ट की वजह से होती है। बार-बार फाल्ट होने की मूल वजह स्वीकृत भार और संसाधनों की क्षमता में अंतर है।
बिजली आपूर्ति में बनाया रिकॉर्ड
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का कहना है कि प्रदेश में भीषण गर्मी में आपूर्ति का रिकॉर्ड बन रहा है। आपूर्ति में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। उत्पादन भी बढ़ रहा है। ऊर्जा विभाग लगातार मजबूत विद्युत प्रबंधन एवं बेहतर आधारभूत संरचना के माध्यम से प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है। नए सबस्टेशनों के निर्माण, ट्रांसमिशन एवं वितरण व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा सतत मॉनिटरिंग की जा रही है।
| हर दिन बढ़ रही है बिजली की मांग |
| 16 मई |
27776 मेगावाट |
| 17 मई |
28904 मेगावाट |
| 18 मई |
29330 मेगावाट |
| 19 मई |
30160 मेगावाट |
| 20 मई |
30458 मेगावाट |
| 21 मई |
31000 मेगावाट |