तीन हजार कुएं जलहीन
उमाशंकर पांडेय ने बताया कि कभी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली बाधैन नदी का जल प्रवाह कम हो गया है, जबकि रंज नदी लगभग सूख चुकी है। बांदा की कम से कम 10 छोटी नदियां लगभग समाप्त हैं। तीन हजार कुएं जलहीन हैं। इनमें नरैनी, गिरवां और छिल्ला क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पड़ोसी महोबा जिले के चुकाबरई क्षेत्र में करीब 300 क्रशर मशीनें लगातार पहाड़ों का सीना चीर रही हैं। इसका असर पूरे बुंदेलखंड के पर्यावरण और जलवायु पर पड़ रहा है।
वन, सिंचाई, बागवानी, लोक निर्माण और केंद्रीय जल आयोग समेत सभी विभागों को मिलकर ठोस कार्ययोजना बनानी होगी। बड़े पैमाने पर पौधरोपण, जल संरक्षण, पारंपरिक जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन और अवैध खनन पर सख्ती के बिना बांदा को बढ़ती गर्मी और गहराते जल संकट से बचाना मुश्किल होगा।
देश में सबसे गर्म बांदा
27 अप्रैल 2026 को बांदा में 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जो उस दिन देश में सबसे अधिक था। यह 1951 के बाद अप्रैल महीने का यहां का सर्वाधिक तापमान भी रहा। इससे पहले अप्रैल 2022 और 2026 में 47.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ था। हालांकि बांदा का अब तक का सर्वाधिक तापमान 49.2 डिग्री सेल्सियस है, जो 10 जून 2019 को दर्ज किया गया था।
| मई 2026 में भी रिकॉर्ड तोड़े |
| 17 मई |
46.4 डिग्री सेल्सियस |
| 18 मई |
47.6 डिग्री सेल्सियस |
| 19 मई |
48.2 डिग्री सेल्सियस |
| 20 मई |
48 डिग्री सेल्सियस |
फैक्ट फाइल : बांदा के 105 वर्ग किमी क्षेत्र में केवल तीन प्रतिशत हरित क्षेत्र बचा है। बुंदेलखंड के अन्य जिलों की तुलना में यह बेहद कम है। चित्रकूट में करीब 18 प्रतिशत, ललितपुर में 11.5 प्रतिशत और झांसी में लगभग छह प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। हरियाली में आई इस भारी कमी ने बांदा की प्राकृतिक ठंडक खत्म कर दी है।
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