प्रदेश में चल रही बिजली की किल्लत को देखते हुए सरकार शनिवार को एक बार फिर हरकत में आई। मुख्य सचिव ने बिजली विभाग के अधिकारियों को बुलाकर उनकी जमकर फटकार लगाई।
बिजली अधिकारियों को शेड्यूल के अनुसार ही बिजली मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शहरों को 15 से 24 घंटे बिजली
मुख्य सचिव आलोक रंजन शनिवार को अपने कार्यालय में बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में बिजली के हालात की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि निर्धारित शेड्यूल के अनुसार बिजली देने के लिए फीडरवाइज बिजली आपूर्ति की सूचना उपलब्ध कराई जाए। शेड्यूल के अनुसार जितनी जरूरी हो उतनी बिजली नियमानुसार खरीदी जाए।
खराब होने पर ट्रांसफार्मरों को तत्काल ठीक कराया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी तापीय एवं जल विद्युत इकाइयां पूरी क्षमता पर चलाई जाएं।
प्रमुख सचिव, ऊर्जा संजय अग्रवाल ने बताया कि बिजली की उपलब्धता को देखते हुए शहरों में 15 से 24 घंटे व ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे बिजली देने का निर्णय किया गया है।
तीन-चार महीने में होगा उत्पादन
संजय अग्रवाल ने कहा कि जिस दिन अधिक बिजली उपलब्ध होगी उस दिन अधिक बिजली दी जाएगी। जिला स्तरीय और बड़े शहरों में रात में 11 व 12 बजे के बाद बिजली नहीं काटी जाएगी।
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा ने बताया कि अनपरा डी को गत शुक्रवार को स्टार्ट-अप पावर उपलब्ध करा दी गई है।
अब 500 मेगावाट का बिजली उत्पादन तीन-चार महीने में शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बजाज की 45 मेगावाट की एक मशीन शनिवार रात से शुरू हो गई है।
मेघालय से बैंकिंग के आधार पर शनिवार से 50 मेगावाट बिजली मिलने लगी है। बैठक में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विद्युत उत्पादन निगम, कामरान रिजवी सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।