टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों से इंटरनेट व अन्य सुविधाओं के लिए एडवांस रकम लेती हैं, लेकिन वे मोबाइल टावर का हर माह बिजली बिल नहीं अदा करतीं हैं। इसका खुलासा करते हुए पॉवर कॉर्पोरेशन ने प्रदेश स्थित 2194 मोबाइल टावरों के बकाएदार कंपनियों की सूची जारी की है। इसमें कंपनियों पर जुलाई तक बिजली बिल के 18 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई है।
पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने बीती तीन सितंबर को इस संबंध में सभी विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को पत्र भेजकर नाराजगी जताई है और बकाया वसूलने के निर्देश दिए हैं। पत्र में बड़े बकाएदार के तौर पर एक खास टेलीकॉम कंपनी का उल्लेख किया गया है। पत्र के मुताबिक पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में मोबाइल टावरों का सबसे ज्यादा बिजली बिल बकाया है। यहां 556 कनेक्शनों पर 1176.31 लाख रुपये की देनदारी है। दूसरे नंबर पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम है।
आदेश के बावजूद नहीं काट रहे कनेक्शन
एक मोबाइल टावर का बिजली बिल 10 से 50 हजार रुपये का होता है। कॉर्पोरेशन ने टावरों के बिजली बिल वसूलने की जिम्मेदारी एक्सईएन को सौंपी है। आदेश है कि जो बिल न भरे कनेक्शन काट दें, लेकिन मोबाइल कंपनियों से सांठगांठ के चलते बिल बाकी होने के बावजूद विद्युत आपूर्ति जारी रहती है।
निगमों में टावरों के कनेक्शन व देनदारी
निगम कनेक्शन देनदारी रुपये में
पूर्वांचल 556 1176.31 लाख
मध्यांचल 598 447.36 लाख
दक्षिणांचल 436 119.28 लाख
पश्चिमांचल 604 56.19 लाख
जिन एक्सईएन, एसडीओ, जेई की लापरवाही से मोबाइल टावर के बिजली बिल की वसूली नहीं हो रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। पावर कॉर्पोरेशन से जारी सूची के बकाएदारों से वसूली की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
- प्रदीप कक्कड़, निदेशक (वाणिज्य ) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम