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यूपीः समय से समस्याओं का हल नहीं हुआ तो बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं को देंगी मुआवजा

Sat, 12 Oct 2019 01:05 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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ब्रेक डाउन, केबल फॉल्ट समेत अन्य समस्याओं का तय अवधि में समाधान नहीं करने पर बिजली कंपनियों को अब उपभोक्ताओं को मुआवजा देना पड़ेगा। समस्याओं के समयबद्ध तरीके से निस्तारण के लिए उप्र विद्युत नियामक आयोग ने ‘स्टैंडर्ड ऑफ  परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019’ का ड्राफ्ट तैयार किया है।

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इसमें मुख्य तौर पर ब्रेक डाउन, केबल फॉल्ट, ट्रांसफार्मर जलने या बदलने, नया कनेक्शन लेने, मीटर रीडिंग में गड़बड़ी, लोड घटाने या बढ़ाने जैसी समस्याओं के समाधान के लिए समय सीमा तय की जाएगी। आयोग ने शुक्रवार को ड्राफ्ट जारी करते हुए उपभोक्ताओं से एक नंवबर तक सुझाव मांगे हैं। इस पर अंतिम सुनवाई 11 नवंबर को होगी। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा।

बिजली उपभोक्ताओं से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विद्युत वितरण संहिता-2005 में समय सीमा तय थी, लेकिन इसके मुताबिक उपभोक्ताओं की समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जा रहा। इसे देखते हुए विद्युत नियामक आयोग ने नए सिरे से मानक निर्धारित करने के लिए ‘स्टैंडर्ड ऑफ  परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019’ तैयार किया है।
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इसके लागू होने पर बिजली कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण करना होगा। ऐसा न करने उन्हें मुआवजा देना पड़ेगा। उप्र विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि प्रस्तावित ड्राफ्ट पर परिषद जल्द ही एक विधिक प्रस्ताव आयोग के समक्ष पेश करेगी।

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60 दिन में देना ही होगा मुआवजा

प्रस्तावित रेगुलेशन में उपभोक्ता को हर हाल में 60 दिन के अंदर मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। किसी उपभोक्ता को एक वित्तीय वर्ष में उससे लिए जाने वाले फिक्स चार्ज के 30 प्रतिशत से अधिक मुआवजा नहीं दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर 1 किलोवाट का कनेक्शन लेने वाला उपभोक्ता यदि महीने में 100 रुपये प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज देता है तो उसका एक साल में फिक्स चार्ज 1200 रुपये हुआ। यानी एक वित्तीय वर्ष में उस उपभोक्ता को अधिकतम 360 रुपये ही मुआवजा मिल सकेगा।

      समस्या                                                       मुआवजा राशि
वोल्टेज विचलन                                                100 रुपये प्रतिदिन
लो वोल्टेज                                                        250 रुपये प्रतिदिन
नया कनेक्शन (वितरण मेंस की उपलब्धता पर)    100 रुपये प्रतिदिन
मीटर रीडिंग में गड़बड़ी                                      200 रुपये प्रतिदिन
डिफेक्टिव मीटर                                                 50 रुपये प्रतिदिन
बिलिंग की शिकायत                                            50 रुपये प्रतिदिन
लोड घटाना-बढ़ाना                                            50 रुपये प्रतिदिन
ट्रांसफार्मर फेल होने पर                                    150 रुपये प्रतिदिन
अंडरग्राउंड केबल ब्रेकडाउन                           100 रुपये प्रतिदिन
उपकेंद्र विस्तार व निर्माण                                 500 रुपये प्रतिदिन
कॉल सेंटर द्वारा रिस्पांस न देना                           50 रुपये प्रतिदिन
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