ब्रेक डाउन, केबल फॉल्ट समेत अन्य समस्याओं का तय अवधि में समाधान नहीं करने पर बिजली कंपनियों को अब उपभोक्ताओं को मुआवजा देना पड़ेगा। समस्याओं के समयबद्ध तरीके से निस्तारण के लिए उप्र विद्युत नियामक आयोग ने ‘स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019’ का ड्राफ्ट तैयार किया है।
इसमें मुख्य तौर पर ब्रेक डाउन, केबल फॉल्ट, ट्रांसफार्मर जलने या बदलने, नया कनेक्शन लेने, मीटर रीडिंग में गड़बड़ी, लोड घटाने या बढ़ाने जैसी समस्याओं के समाधान के लिए समय सीमा तय की जाएगी। आयोग ने शुक्रवार को ड्राफ्ट जारी करते हुए उपभोक्ताओं से एक नंवबर तक सुझाव मांगे हैं। इस पर अंतिम सुनवाई 11 नवंबर को होगी। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा।
बिजली उपभोक्ताओं से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विद्युत वितरण संहिता-2005 में समय सीमा तय थी, लेकिन इसके मुताबिक उपभोक्ताओं की समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जा रहा। इसे देखते हुए विद्युत नियामक आयोग ने नए सिरे से मानक निर्धारित करने के लिए ‘स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019’ तैयार किया है।
इसके लागू होने पर बिजली कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण करना होगा। ऐसा न करने उन्हें मुआवजा देना पड़ेगा। उप्र विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि प्रस्तावित ड्राफ्ट पर परिषद जल्द ही एक विधिक प्रस्ताव आयोग के समक्ष पेश करेगी।