पावर कॉर्पोरेशन का दावा है कि 2016 तक प्रदेश में 21 हजार मेगावाट बिजली मिलने लगेगी। इस समय लगभग 10 हजार मेगावाट की उपलब्धता है। करीब 7,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का इंतजाम कर लिया गया है जबकि 4000 मेगावाट के लिए प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसमें केंद्रीय सहायता तथा निजी क्षेत्र द्वारा किया जाने वाला निवेश भी शामिल है। नए साल में इलाहाबाद के करछना में बिजलीघर का काम शुरू कराने की कोशिश हो रही है।
प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन संजय अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस में सवालों के जवाब में बताया कि 2016 से गांवों को 16-18 घंटे तथा शहरों को 22-24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए लगभग 21 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत होगी।
निर्माणाधीन अनपरा डी, बारा, ललितपुर, श्रीनगर तथा मेजा परियोजनाओं से 2015-16 में बिजली मिलने लगेगी। 2175 मेगावाट बिजली खरीदने का करार केस-1 बिडिंग के जरिये किया गया है। इसे मिलाकर 2016 तक लगभग 17 हजार मेगावाट की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।
केंद्रीय सेक्टर में बढ़ेगी यूपी की हिस्सेदारी
शेष 4000 मेगावाट का इंतजाम किया जा रहा है। अगले दो साल में केंद्रीय सेक्टर में लगने वाली परियोजनाओं में भी यूपी की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
अग्रवाल का दावा है कि 2016 से शहरों और गांवों को ज्यादा आपूर्ति करने की रणनीति पर तेजी से काम चल रहा है और जरूरत के मुताबिक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाएगी।
संजय अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने एवं आपूर्ति में सुधार के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
22,556 करोड़ रुपये की लागत से ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार कराने का काम चल रहा है। इसमें 8253 करोड़ की ट्रांसमिशन परियोजनाएं पीपीपी मॉडल पर तैयार कराई जा रही हैं।
वितरण नेटवर्क पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे जबकि ग्रामीण विद्युतीकरण पर लगभग 11,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लगभग 65 हजार करोड़ रुपये का निवेश बिजली उत्पादन परियोजनाओं पर प्रस्तावित है।
करछना परियोजना पर नए साल में शुरू होगा काम
ग्रामीण विद्युतीकरण, ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क के लिए केंद्र से भी मदद मांगी गई है। सवालों के जवाब में अग्रवाल ने बताया कि गाजियाबाद, मेरठ व वाराणसी की बिजली व्यवस्था के निजीकरण के लिए कंसल्टेंट मेकॉन से फिजिबिलिटी स्टडी कराई जा रही है।
मार्च 15 तक रिपोर्ट आने की संभावना है। इसके बाद उपभोक्ताओं केहित को ध्यान में रखते हुए कोई फैसला होगा। इस समय एकीकृत तकनीकी एवं वाणिज्यिक लाइन हानियां करीब 41 फीसदी हैं।
इसमें पांच फीसदी कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। 31 मार्च तक मीटिरिंग का भी लक्ष्य है। संजय अग्रवाल बताया कि जेपी के हाथ खींच लेने के बाद 1320 मेगावाट क्षमता की करछना परियोजना राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपी गई है।
इसके लिए गठित संगम जनरेशन कंपनी को उत्पादन निगम को हस्तांतरित करने की शर्तें आदि तय की जानी है। यह प्रक्रिया अगले माह तक पूरी कर ली जाएगी। केंद्र ने इसके लिए जेपी को दिया गया कोल लिंकेज उत्पादन निगम को हस्तांतरित करने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। जनवरी के बाद काम शुरू कराने के लिए टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू होगी।