लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग में ऑनलइान पढ़ाई के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप पर बीती रात अराजकतत्व ने दोबारा अश्लील वीडियो पोस्ट किए।
यही नहीं, कुछ छात्र-छात्राओं के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया। अंत में लिखा ‘नाम तो पता ही होगा।’ फिर उसने एक नाम और मोबाइल नंबर भी लिखा, लेकिन वह नंबर भी बंद आ रहा है।
यही नहीं, अराजक तत्व ने उक्त नंबर से ही एक नया ग्रुप बनाकर शिक्षकों, छात्र-छात्राओं को जोड़ा और अश्लील वीडियो पोस्ट किए। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों बार इस बार उसी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया।
जिससे पूर्व में वीडियो पोस्ट किए गए थे। पर विवि प्रशासन और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वहीं, विवि प्रशासन का कहना है कि दोबारा तहरीर दी है। नंबर पुलिस ही ट्रेस कर पाएगी। दूसरी तरफ, विद्यार्थियों ने इस मामले में राज्यपाल, सीएम व पुलिस अफसरों, विवि अधिकारियों को ट्विटर पर शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
मालूम हो कि बीते रविवार को विभाग के उक्त ग्रुप पर अराजक तत्व ने अश्लील वीडियो व संदेश पोस्ट किए थे। इस पर विवि प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराई। उसी ग्रुप पर दोबारा बुधवार रात लगभग सवा एक बजे कई अश्लील वीडियो पोस्ट किए गए।
यही नहीं, उक्त नंबर से कुछ छात्र-छात्राओं का नाम लिखते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। सुबह ग्रुप देखकर छात्रों ने इसकी सूचना विभागाध्यक्ष को दी। वहीं, कई छात्राओं ने तुरंत ग्रुप छोड़ भी दिया है। विभागाध्यक्ष ने चीफ प्रॉक्टर को सूचित दी।
इस मामले में विवि की छवि धूमिल हो रही है, लेकिन न तो विवि प्रशासन न ही पुलिस अभी तक वीडिया पोस्ट करने वाले नंबर को ट्रेस नहीं कर पाई है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर विवि के अधिकृत ग्रुप पर कोई बाहरी या अराजक तत्व कैसे जुड़ गया?
बंद नंबर से फिर ग्रुप बनाकर डाला अश्लील वीडियो
अराजकतत्व ने पुराने नंबर से ही बुधवार रात दोबारा एक ग्रुप बनाया। इसमें हिंदी व प्राचीन इतिहास विभाग के शिक्षकों व विद्यार्थियों का जोड़ा और अश्लील वीडियो व फोटो पोस्ट करने के बाद एग्जिट हो गया। सुबह शिक्षक व छात्रों को इसकी जानकारी हुई। इस बारे में चीफ प्रॉक्टर प्रो. दिनेश कुमार ने बताया कि पूर्व में गलत सामग्री अपलोड करने के मामले में एक दर्जन छात्रों व शिक्षकों से पूछताछ हो चुकी है। पर जब तक उक्त नंबर की पहचान पुलिस नहीं करेगी तब तक हम कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं।
विवि के रिकॉर्ड में नहीं है नंबर
विवि प्रशासन ने पूर्व में अश्लील वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा करने वाले नंबर की पड़ताल की। प्रवेश, परीक्षा, छात्रवृत्ति आदि के लिए भरे जाने वाले सारे नंबरों की पड़ताल करवाई, लेकिन उक्त नंबर किसी भी फार्म में नहीं दिया गया है। प्रॉक्टर प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि उक्त नंबर रिकॉर्ड में नहीं है। अब इसके बारे में जानकारी सर्विलांस से ही मिल सकती है।
प्राचीन इतिहास विभाग के हेड से जानकारी मिली है कि अराजकतत्व ने रात में नया ग्रुप बनाकर गलत सामग्री अपलोड की। वहीं, एक शिक्षक के ग्रुप पर भी दोबारा गलत सामग्री भेजी है। मामले में कड़ी कार्रवाई व एफआईआर के लिए पुलिस को पत्र भेजा है। पूर्व के मामले में भी एफआईआर करवाई गई है। विवि अपने स्तर पर भी जांच कर रहा है।
- प्रो. दिनेश कुमार, प्रॉक्टर, लविवि
यह पूरी तरह से आपराधिक गतिविधि है। किसी अराजकतत्व ने शिक्षकों के नंबर जोड़कर ग्रुप बनाए और गलत सामग्री पोस्ट कर निकल गया। मामले में पुलिस प्रशासन को पड़ताल कर कार्रवाई करनी चाहिए। बंद नंबर को खोज पाना भी सर्विलांस से ही संभव है। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों से बात की गई है।
प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति, लविवि
फिर उसी प्रकार का मामला सामने आया है। इसमें मोबाइल कंपनी से डिटेल मंगवाई गई है। बकरीद की छुट्टी पड़ने के कारण डिटेल नहीं मिल पाई है। व्हाट्सएप ग्रुप पर गलत सामग्री भेजने वाला अराजकतत्व साइको लग रहा है। पड़ताल कर जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- यशकांत सिंह, इंस्पेक्टर, हसनगंज