लोकसभा चुनाव में यूपी की जमीन पर किन दलों के बीच सीधा मुकाबला होगा, इस बारे में तस्वीर आगे साफ होगी। पर, रैलियों की जंग में तो फिलहाल समाजवादी पार्टी और भाजपा ही आमने-सामने होती हुई दिख रही है।
यह सियासी गणित हो अथवा आपसी समझदारी। पर, सपा और भाजपा के बीच रैलियों की जंग में कुछ संयोग बार-बार घट रहे हैं।
जो सियासी गलियारों में तमाम चर्चाओं को भी जन्म दे रहे हैं और इस मुकाबले को दिलचस्प भी बना रहे हैं। गुरुवार को चौथी बार ऐसा संयोग फिर घटित होने जा रहा है।
तीसरी बार यूपी में मोदी और मुलायम सिंह के एक साथ दहाड़ेंगे। मोदी गोरखपुर में रैली करेंगे तो मुलायम सिंह यादव पुत्र मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ वाराणसी में रैली को संबोधित करेंगे।
गुरुवार को दूसरा ऐसा मौका होगा जब सपा के दोनों नेताओं के दहाड़ने का मैदान एक होगा। मोदी की रैली का स्थल गोरखपुर भी पूर्वांचल में है तो मुलायम की रैली का स्थल वाराणसी भी पूर्वांचल में ही आता है।
इससे पहले पश्चिम में 21 नवंबर को ऐसा ही संयोग घट चुका है। उस दिन दोनों की प्रदेश के पश्चिमी मैदान पर रैली की जंग हुई थी। मुलायम और अखिलेश ने बरेली और मोदी ने आगरा में रैली की थी।
प्रदेश में दोनों के एक साथ रैली का तीसरा संयोग 20 दिसंबर को भी घट चुका है। मोदी ने 20 दिसंबर को वाराणसी और मुलायम सिंह यादव व अखिलेश ने बदायूं में रैली की थी।
पहले मोदी आज मुलायम
सपा और भाजपा के बीच एक ही दिन रैलियां करने का संयोग घटित नहीं हो रहा है बल्कि दूसरी बार मुलायम सिंह यादव की उस शहर में रैली होने जा रही है जहां पहले मोदी की रैली हो चुकी है।
वाराणसी में मोदी की 20 दिसंबर को रैली हो चुकी है। अब गुरुवार को उसी वाराणसी में मुलायम की रैली होने जा रही है। इससे पहले झांसी में यह संयोग घट चुका है। मोदी ने झांसी में 25 और मुलायम 8 जनवरी को रैली की।
कुछ मामलों में कल अलग होगा माहौल
इन संयोगों के बावजूद गुरुवार का माहौल पहले की रैलियों से कुछ अलग होगा। मुलायम और मोदी उस जमीन पर होंगे जो अपने विशिष्ट तेवरों के लिए जानी जाती है।
गोरखपुर भाजपा के भगवा चेहरे योगी आदित्यनाथ का इलाका है तो वाराणसी भगवा मंडली के एजेंडे को ताकत देने वाली जमीन रही है।
मोदी गोरखुपर के मंच पर पूर्वांचल में योगी के साथ भगवा रंग को गाढ़ा करने में कितना सफल होते हैं तो वाराणसी में मोदी के बाद पहुंचने वाले मुलायम सिंह भगवा रंग को हल्का करने में कितने कामयाब होते हैं?
इसे देखना भी काफी दिलचस्प होगा। यह बात भी विशेष रूप से देखने वाली और दिलचस्प होगी। मोदी ने अभी तक यूपी की रैलियों में अपने तेवरों को न तो हिंदुत्ववादी रंग दिया है और न भगवा तेवर।
इसलिए यह देखना भी रोचक होगा कि हिंदुत्ववादी नेता के साथ गोरखपुर की भगवा जमीन पर मोदी के भाषण का किस रंग में रंगा होता है।