मुख्तार अंसारी के चुनावी मैदान से हट जाने के बाद वाराणसी संसदीय सीट के ढाई लाख से अधिक मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में खींचने के लिए खास तौर पर कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के बीच जद्दोजहद तेज हो गई है।
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आप समर्थक उम्मीद जता रहे हैं कि केजरीवाल की साफ-सुथरी छवि के अलावा कौमी एकता दल के समर्थकों का कांग्रेस प्रत्याशी की तुलना में केजरीवाल के प्रति नरम रुख इस बड़े मतदाता समूह को उनके पाले के करीब लाएगा।
वहीं कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय के समर्थकों को लगता है कि उनके प्रत्याशी का स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा रंग दिखाएगा और बनारस का मुस्लिम मतदाता मोदी के खिलाफ अपने बीच के प्रत्याशी को प्राथमिकता देगा।
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मोदी को लेकर बेहद चौकन्ना मुस्लिम मतदाता अंतत: किधर जाएगा, यह तो नतीजे आने पर ही साफ होगा, लेकिन दोनों दल मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में खड़ा करने के लिए नए सिरे से सक्रिय हो गए हैं।
देखने वाली होगी बात, मुस्लिम किसे देंगे वोट
मुख्तार के मैदान से हटने के बाद बनी चुनावी स्थितियों पर फौजदारी के बड़े वकील व वाराणसी सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नीलकंठ तिवारी टिप्पणी करते हैं, ‘करीब 23 साल पहले कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की हत्या हो गई थी।
इस मामले में जो एफआईआर दर्ज हुई थी, उसमें मुख्तार अंसारी का भी नाम था। उस घटना के बाद ही अजय राय सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए और उन्हें मुख्तार विरोधी राजनीतिक खेमे से ही जोड़कर देखा जाता रहा है।
ऐसे में सेक्युलरिज्म के नाम पर ये दोनों एक-दूसरे को गले लगा लेंगे, कम तो कम मेरे तो गले नहीं उतरता।
हालांकि मैं इस बात से भी सहमत नहीं हूं कि किसी दल या माफिया के हांके पर सारा मुस्लिम वोटर किसी एक के पाले में खड़ा हो जाएगा।'
अरविंद को मिल सकता है फायदा
नीलकंठ तिवारी की टिपप्णी न केवल बनारस के चुनाव पर पड़ने वाली माफिया की छाया को दर्शाती है बल्कि मुस्लिम मतों के रुझान के भी संकेत देती है।
आप समर्थक फिलहाल खुलकर मुख्तार फैक्टर पर खुलकर कुछ नहीं बोलते, पर उनकी नजर मुख्तार-अजय राय के रिश्तों से उपजने वाले समीकरणों पर अवश्य है।
केजरीवाल समर्थक महफूज कहते हैं, ‘हमलोग मुस्लिम बस्तियों में हर घर की सांकल खटखटाकर यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि गरीबों-मजलूमों की आवाज केजरीवाल ही बन सकते हैं।
लोग हमारी बातों को गौर से सुन रहे हैं। केजरीवाल के नामांकन के बाद माहौल में उफान आएगा।’ वहीं एक अन्य वालंटियर अपना नाम न छापने की शर्त पर कहता है कि अन्य फैक्टर्स पर भी गुणा-भाग चल रहा है।
केजरीवाल के अमृतसर में दिए गए इसबयान ‘राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी को हराने के लिए हम साथ चलने वाली सभी ताकतों का समर्थन लेने को तैयार हैं’ से संकेत चले गए हैं। एक हफ्ते में तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाएगी।
अजय राय को मिल सकता है बेहतर परिणाम
वहीं अजय राय कौमी एकता दल के संभावित रुख को समझते हैं, इसलिए उनको अपने पाले में खींचने की कोशिश में वक्त बर्बाद करने के बजाय स्थानीयता के मुद्दे की दुहाई के साथ वोट मांग रहे हैं।
वे कहते हैं, ‘बाहरी परिंदे तो चुनाव बाद नजर नहीं आएंगे, मैं हर सुख-दुख में साथ रहूंगा।’ राय की बात सिरे से खारिज होती भी नहीं दिखती।
मुस्लिम बहुल बस्ती लल्लापुरा के रहने वाले बुनकर बिरादाराना तंजीम 12 के महासचिव मुमताज अहमद बाबर कहते हैं कि मोदी के बनारस से चुनाव लड़ने के बाद यहां के मुसलमानों में भावना उभरी है कि उनका नुमांइदा स्थानीय हो जो दुख-सुख में उनके साथ खड़ा हो सके।
कांग्रेस से जुड़े मुमताज कहते हैं कि स्थानीयता का सवाल इसीलिए दिनोंदिन अहम होता जा रहा है और मुसलमानों को कांग्रेस की तरफ देखने को मजबूर कर रहा है।
मुख्तार अंसारी के मैदान से हटने के बाद शहर के मुसलमानों को इस बात का सुकून हुआ कि अब सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की स्थितियां नहीं बनेंगी।
कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित होने के पहले तक मुस्लिम मतों का झुकाव अरविंद केजरीवाल की तरफ नजर आ रहा था, पर अजय राय के कांग्रेस प्रत्याशी बनने के बाद स्थितियों में बदलाव आया है।
राय स्थानीय हैं, दुख-सुख में खड़े होने वाले हैं। उनके निजी संपर्क भी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के समय से मुस्लिम बस्तियों में उनकी चहलकदमी बढ़ी है। ऐसे में मुस्लिम वोटों का कांग्रेस व केजरीवाल के बीच बंटने का खतरा भी पैदा हो गया है। -मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, शहर मुफ्ती, बनारस