राजनीति में विरोध का अपना ही रंग है। विरोधी दलों के जो नेता कहीं एक-दूसरे की बखिया उधेड़ते दिखते हैं तो दूसरी जगह बेहद अपनेपन से पेश आते हैं। सदन से लेकर सड़क तक सूबे में ऐसे वाकये भरे पड़े हैं।
पर, आजकल नौकरशाही में भी कुछ ऐसा ही दौर चल रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जिन अफसरों को पानी पी-पी कर कोसा गया था अब वे ही अपनी नैया पार लगाने के लिए सरकार को काबिल लगने लगे हैं।
पिछली सरकार के तीन लाडले अफसरों को यह सरकार अब तक मुख्य धारा में ला चुकी है।
इन्हीं में से एक अफसर पिछले दो साल से उपेक्षा का दंश झेल रहे पार्टनरों की उपयोगिता को लेकर सरकार में लामबंदी में जुटे हुए हैं। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगला खुशकिस्मत पार्टनर कौन होगा?