मजदूरों के महकमे के मंत्री सरकारी कोठी छोड़कर विधायक निवास में शिफ्ट हो गए। जी हां, बात श्रम मंत्री शाहिद मंजूर की हो रही है।
गौतमपल्ली की कोठी को अलविदा कहकर वह लाप्लास के उसी फ्लैट में चले गए जिसमें बतौर विधायक रहते थे।
जिस दौर में कोठी के लिए मारामारी हो, पूर्व मंत्री तक आवास छोड़ने को तैयार न हों, उस दौर में कोठी छोड़ने का उनका फैसला कुछ लोगों के गले नहीं उतरा। वे इसके मायने तलाश रहे हैं।
कुछ इसे भविष्य के राजनीतिक फैसलों से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ फक्कड़ समाजवादी मिजाज से। दरअसल, चर्चा है कि भविष्य में एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों की जिम्मेदारी बदल सकती है।
कुछ लोग कोठी छोड़ने के फैसले को इसी रोशनी में देख रहे हैं। एक शुभचिंतक ने मंत्री ने पूछ ही लिया, आखिर कोठी छोड़ने का फैसला क्यों ?
मंत्री ने कहा, 38 साल से मेरठ में रेंट कंट्रोल के मकान में रह रहे हैं। पांच बार वालिद साहब और तीन बार मैं विधायक चुना गया। कभी कोठी में रहने की इच्छा नहीं हुई। कोठी से ज्यादा मन फ्लैट में लगता है?