देश में सत्ता बदल चुकी है। केंद्र में अच्छे और योग्य अफसरों की तलाश है। ऐसे में बहुतेरे अफसर दिल्ली जाने की जुगत में लग गए हैं।
हों भी क्यों न, उन्हें 2017 जो दिख रहा है। प्रदेश के एक आला अफसर हैं जिनके पास शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग है। पहले इनके पास साड़ी और कंबल खरीदने वाला विभाग था।
चर्चा है कि सरकार के मनमाफिक काम न करने पर उनसे यह विभाग छीन लिया गया और कम महत्व वाले विभाग में तैनाती दे दी गई।
इसके बाद से ही वे बेचैन हैं। शिक्षा विभाग का अतिरिक्त चार्ज तो मिला है, पर दिल है कि मानता नहीं। जनाब यहां से निकलना चाहते हैं।
चर्चा है कि साहब आजकल दिल्ली बहुत जा रहे हैं। बहाना तो मीटिंग का करते हैं, लेकिन चर्चा है कि वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की सेटिंग में लगे हैं।
कहा तो यह भी जाता है कि केंद्र में हाल ही में बनी सरकार के एक कद्दावर मंत्री के वह बहुत करीबी हैं। अब देखना यह होगा कि मीटिंग के बहाने कितनी सेटिंग कर पाते हैं।