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मसाज पार्लर में मां-बेटियों का यौन शोषण, आरोपी को बचाने में खेल

Tue, 21 Jun 2016 12:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आशियाना निवासी महिला और उसकी बेटियों के यौन शोषण के आरोपी सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर लखनलाल गुप्ता को बचाने के लिए क्राइम ब्रांच और आशियाना पुलिस ने बड़ा खेल किया। पुलिस ने पीड़िता की तरफ से जो एफआईआर लिखी, उसमें बेटियों के यौन शोषण का जिक्र ही नहीं किया। 
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एफआईआर में चीफ इंजीनियर के ठेकेदार साथी व रेप और यौन शोषण के दूसरे आरोपी मनीष का नाम ही दर्ज नहीं किया। नतीजतन, एफआईआर में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पॉक्सो) और मनीष का नाम नहीं जोड़ा गया, जबकि उस वक्त पुलिस ने पॉक्सो एक्ट लगाने की जानकारी दी थी। 

इस बीच पीड़िता ने थाना से लेकर एसएसपी की चौखट तक  रिपोर्ट में बेटियों के यौन शोषण की बात शामिल करने की गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 

पीड़िता ने बेटियों से यौन शोषण के कई वीडियो पुलिस को दिए थे। इनमें चीफ इंजीनियर के साथ उसका साथी ठेकेदार मनीष भी बच्चियों का शोषण करता दिख रहा है। हालांकि, चीफ इंजीनियर को बचाने में जुटी पुलिस ने वीडियो में कई महत्वपूर्ण तथ्य नजरअंदाज कर दिए। पीड़िता ने बताया कि वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है। 
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क्राइम ब्रांच को भी दिए थे वीडियो

जब क्राइम ब्रांच के पास पूरा मामला गया तो उसने आपबीती सुनाई। क्राइम ब्रांच को वीडियो भी दिए थे। क्राइम ब्रांच के लोगों ने उससे जानकारी लेने के बाद ही एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर लिखवाई। उसने बेटियों से यौन शोषण की बात लिखने को कहा तो क्राइम ब्रांच वालों ने मना कर दिया। 

यही वजह थी कि एफआईआर में बेटियों का जिक्र ही नहीं है। बाद में पता चला कि यह सारा खेल चीफ इंजीनियर को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए किया गया था। पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया तो अलग से प्रार्थनापत्र देने को कहकर उसे टरका दिया गया। 

बकौल पीड़िता, उसने कई प्रार्थनापत्र दिए। बीती 13 जून को पीड़िता की बेटी ने एसएसपी से भी गुहार लगाई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता का आरोप है कि चीफ इंजीनियर के धन-बल के सामने आशियाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने खेल कर दिया। 

इसी कारण चीफ इंजीनियर को आसानी से जमानत मिल गई। महिला ने आला अधिकारियों से एफआईआर में पॉक्सो एक्ट व चीफ इंजीनियर के ठेकेदार दोस्त मनीष का नाम जोड़ने की अपील की है।

मुकदमा वापस लेने का दबाव, घर से निकलवाया

पीड़िता ने बताया कि क्राइम ब्रांच और आशियाना पुलिस के खेल से चीफ इंजीनियर को आसानी से जमानत मिल गई। जेल से बाहर आते ही उसके गुर्गे महिला और उसके परिवारीजनों को धमकाने लगे। 

आरोप है कि चीफ इंजीनियर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहा है। उसे किराये के मकान से निकलवा दिया। अब महिला पति व दो बेटियों के साथ रेलवे स्टेशन पर गुजारा कर रही है। कमाई का कोई जरिया नहीं है। 

बेटियों पर हर वक्त हैवानों की निगाहें रहती हैं। चीफ इंजीनियर चाहता है कि पूरा परिवार लखनऊ छोड़कर बिहार लौट जाए। अगर वापस चले जाते हैं तो मुकदमे की पैरवी करने वाला कोई नहीं रहेगा और चीफ इंजीनियर पर शिकंजा नहीं कस पाएगा।
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ये था मामला

कृष्णानगर निवासी सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर लखनलाल गुप्ता और उसका ठेकेदार दोस्त मनीष करीब ढाई साल से आशियाना में रहकर मसाज पार्लर चलाने वाली महिला से रेप करते थे। साथ ही उसकी दो बेटियों का यौन शोषण भी करते थे। 

पीड़िता ने दोनों की करतूत की मोबाइल कैमरे से वीडियो बना ली थी। फंसने के डर से चीफ इंजीनियर ने क्राइम ब्रांच से सेटिंग करके आशियाना थाना में पीड़िता और उसके पति पर अश्लील फिल्म बनाकर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। 

पुलिस ने पीड़िता और उसके पति को गिरफ्तार किया तब असली कहानी सामने आई। पुलिस ने पीड़िता की तरफ से रेप की रिपोर्ट लिखकर चीफ इंजीनियर को गिरफ्तार किया था। क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मियों के खेल का खुलासा होने पर तत्कालीन एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने दो सिपाहियों को सस्पेंड करके एएसपी प्रोटोकॉल को जांच सौंपी थी।
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