सेक्सटॉर्शन गिरोह से त्रस्त होकर व्यापारी के खुदकुशी करने के मामले की तफ्तीश में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस गिरोह ने व्यापारी को शिकार बनाया उनके मोबाइल नंबर असम के दो शख्स की आईडी पर हैं। गिरोह ने राजस्थान के रेवाड़ी में फर्जी आईडी पर खाते खुलवाए और भरतपुर जिले के एक गांव में बैठकर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं। एडीसीपी पूर्वी की टीम की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। एक टीम भरतपुर में दो दिन से तफ्तीश कर रही है। कुछ संदिग्धों को उठाया भी है। पुलिस जल्द वारदात का खुलासा भी कर सकती है।
बीबीडी इलाके के 50 वर्षीय व्यापारी को सेक्सटॉर्शन गिरोह ने वीडियो कॉल की थी। जाल में फंसाकर ब्लैकमेल किया और 88 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। 10 लाख रुपये की और मांग कर रहे थे। इससे त्रस्त होकर व्यापारी ने 17 सितंबर को इंदिरा नहर में कूदकर खुदकुशी कर ली थी। 18 सितंबर को देर रात नगराम इलाके में नहर से शव बरामद हुआ था। पुलिस ने अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की तो पता चला कि दो नंबरों से आरोपियों ने व्यापारी से संपर्क किया था। ये दोनों नंबर असम के पते की आईडी पर हैं। आईडी नयनमणि दास और मजमिल लस्कर के नाम की हैं। एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बस ने बताया कि आरोपी प्री-एक्टिवेटेड सिमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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भरतपुर की मिली लोकेशन
जिन दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया वह अभी भी सक्रिय हैं। ये दोनों नंबर राजस्थान के भरतपुर जिले में सक्रिय मिले हैं। जानकारी के मुताबिक भरतपुर जिले के भंडारा गांव में बैठे साइबर अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया। इससे समझा जा सकता है कि मोबाइल नंबर असम के पते की आईडी पर लिए गए और राजस्थान में बैठकर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। जिस खाते में रकम ट्रांसफर करवा रहे हैं वह राजस्थान के रेवाड़ी जिले का है। ये पूरा जाल इसलिए है, जिससे जांच एजेंसी आसानी से उन तक न पहुंच सकें।
जिसके नाम पर खाता उसको पता ही नहीं
साइबर अपराधी जिन बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं वह फेक आईडी पर खुलवाए गए होते हैं। खासकर किसी मजबूर, गरीब लोगों को वह अपने जाल में फंसाते हैं। कुछ रुपये देकर उनकी आईडी लेकर खाता खुलवाकर उसमें पैसे मंगवाते हैं। इस मामले में भी वही किया गया। जिसके नाम पर बैंक खाता है उसको पता तक नहीं है।