इकौना (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के विनियमित क्षेत्र में स्थित मजार व वक्फ बोर्ड की भूमि को लेकर उपजे विवाद के बाद बृहस्पतिवार को पुलिस प्रशासन सख्त रहा। हिंदू संगठनों के विरोध के बाद मजार जाने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग कर मेले का आयोजन नहीं होने दिया गया। इस दौरान एसडीएम व सीओ दल-बल के साथ पूरे समय मौके पर मौजूद रहे।
इकौना के मोहल्ला आजाद नगर निवासी कन्हैया लाल कसौधन ने बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के विनियमित क्षेत्र में स्थित मजार को लेकर अप्रैल में ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन के जरिये कहा था कि राजगढ़ गुलहरिया में गाटा संख्या 1392 रकबा 1.509 हेक्टेयर भूमि सहेट महेट के नाम महफूज है।
यह पुरातत्व विभाग द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण के अंतर्गत आता है जिसकी 200 मीटर परिधि में बिना अनुमति कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। इसी संरक्षित भूमि पर समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से मीरशाह मजार बनाकर अवैध ढंग से कब्जा कर रखा है।
ज्ञापन के माध्यम से यह भी बताया गया था कि सर्वेक्षण में चिह्नित भूमि पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ मकान नंबर 02 इंतेजामिया कमेटी दरगाह हजरत सैयद मीरशाह का बोर्ड लगा दिया गया। यहां प्रत्येक बृहस्पतिवार को एक मेला भी आयोजित किया जाता है। ज्ञापन के माध्यम से इस मेले का आयोजन रोके जाने की मांग की गई थी।
इसके बाद एसडीएम इकौना ने यहां मेला रोकने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद बीते बृहस्पतिवार को मजार पर मेले का आयोजन हुआ। इस पर सख्ती दिखाते हुए पुलिस प्रशासन ने बृहस्पतिवार को मजार पर मेला नहीं लगने दिया।
डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सहेट महेट स्थित मीरा शाह मजार का बुधवार रात एसपी को साथ लेकर निरीक्षण किया गया था। दोनों समुदायों के लोगों से इस मसले को लेकर बातचीत भी की गई। इसके बाद मजार पर लगी टिनशेड, पानी की टंकी, दान पेटी, अलमारी व अतिक्रमण को तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों को 24 घंटे संचालित कर निगरानी के लिए भी कहा गया है।
मजार के रास्ते पर रहा पुलिस का सख्त पहरा
विनियमित क्षेत्र में स्थित मीरा शाह की मजार पर बृहस्पतिवार को मेला न लगने देने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। एक तरफ जहां मुख्य मार्ग पर बैरिकेडिंग कर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, वहीं मजार की तरफ जाने वाले अन्य मार्गों पर भी पुलिस बल तैनात था। इस दौरान वहां वाहनों व लोगों का पैदल आना-जाना भी प्रतिबंधित रहा।