फर्जीवाडे़ पर लगाम कसने का दावा करने वाला पुलिस विभाग राजधानी में खुद फर्जी स्कूल चला रहा है। मामला पुलिस विभाग से जुड़ा होने की वजह से शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अनुसार कोई स्कूल बगैर मान्यता और मानक पूरा किए नहीं चल सकता।
राजधानी में बगैर मान्यता चलने वाले 108 फर्जी स्कूलों को शिक्षा विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद महानगर में पीएसी ग्राउंड में पुलिस मॉडर्न स्कूल बगैर मान्यता के पिछले 19 साल से चल रहा है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बाद से बगैर मान्यता और मानक के एक भी फर्जी स्कूल नहीं चल सकता है। अधिनियम के प्रावधान के अनुसार फर्जी स्कूल पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाना है।
जुर्माने की रकम अधिकतम एक लाख रुपये तक हो सकती है। जुर्माना न अदा करने पर भू-राजस्व की तरह इसकी वसूली करने की व्यवस्था है। इसके बाद विद्यालय संचालक पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश हैं।
अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने के लिए इस साल मार्च महीने से राजधानी में फर्जी स्कूलों की सूची तैयार की गई। सूची में गली-मोहल्ले के छोटे-छोटे स्कूलों को शामिल कर लिया गया। इनमें से 108 अमान्य स्कूलों को दो नोटिस भी जारी कर दी गई।
किसी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है इस स्कूल को
पंचायत चुनाव का हवाला देते हुए जुर्माना वसूली की कार्रवाई फिलहाल रुकी हुई है। दूसरी और शहर के बीचो-बीच स्थित पुलिस मॉडर्न स्कूल को छोड़ दिया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस शिक्षा समिति की ओर से प्रदेश भर में पुलिस मॉडर्न स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से बहुत से स्कूलों की मान्यता नहीं है।
महानगर के पीएसी ग्राउंड में वर्ष 1996 से स्कूल बराबर चल रहा है। स्कूल में आठवीं तक पढ़ाई होती है। पढ़ाई का पैटर्न सीबीएसई पर आधारित है, पर मान्यता किसी बोर्ड से नहीं है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।
दो नोटिस के बावजूद नहीं शुरू हुई जुर्माना वसूलने की कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने पुलिस मॉडर्न स्कूल को मान्यता न होने के बावजूद नोटिस तक जारी नहीं की है। दूसरी ओर जिन अमान्य स्कूलों को नोटिस जारी भी किया है उनके खिलाफ जुर्माना वसूलने की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है।
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
मान्यता के लिए आवेदन करने वाले स्कूलों को फिलहाल जुर्माने से राहत दी गई है। मान्यता समिति की बैठक नवंबर में आयोजित हो चुकी है। पंचायत चुनाव की वजह से मान्यता जारी नहीं की गई है। इसकी आड़ में फर्जी स्कूलों को शह दे दी गई है। मान्यता न होने के बावजूद वे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और शिक्षा विभाग खामोश बैठा है।
बीएसए बोले-जारी होगा नोटिस
पुलिस मॉडर्न स्कूल की कई शाखाओं को मान्यता मिली हुई है इसलिए महानगर स्थित शाखा की मान्यता न होने की जानकारी नहीं थी। आरटीई एक्ट के अनुसार बगैर मान्यता के कोई स्कूल नहीं चल सकता। इसलिए पुलिस मॉडर्न स्कूल को भी नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। विद्यालय को मान्यता लेनी ही होगी।
प्रवीण मणि त्रिपाठी,जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ
स्कूल का दावा-चल रही मान्यता की प्रक्रिया
स्कूल वर्ष 1996 से संचालित है। अभी तक मान्यता की अनिवार्यता नहीं थी। इसलिए मान्यता नहीं ली गई थी। स्कूल में पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड के पैटर्न पर आधारित है। विद्यालय की मान्यता के लिए बेसिक शिक्षा परिषद के पास आवेदन करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मान्यता ले ली जाएगी।
नीलिमा गुप्ता,प्रिंसिपल पुलिस मॉडर्न स्कूल, महानगर