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एक करोड़ की पुरानी करेंसी सहित तीन गिरफ्तार, प्रॉपर्टी डीलर भागा

Thu, 03 Aug 2017 10:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बरामद की गई ओल्ड करेंसी - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में गोमतीनगर पुलिस ने बृहस्पतिवार रात दयाल पैराडाइज चौराहा से हांडा सिटी कार में छिपाकर ले जाई जा रही एक करोड़ रुपये की पुरानी करेंसी सहित तीन लोगों को पकड़ लिया। मौके से प्रापर्टी डीलर व उसका एक साथी भाग निकले।
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पुलिस ने पकड़ी गई करेंसी पुराने लखनऊ के बिल्डरों का होने की आशंका जताई है। पकड़े गए लोगों ने करेंसी के बारे में कोई भी जानकारी से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि प्रापर्टी डीलर रुपये गिनने की बात कहकर उन्हें ले गया था।

रुपयों से भरा बैग एसआरएस मॉल के पास किसी को डिलीवर करना था। करेंसी किसकी है? किसे डिलीवर करनी थी? करेंसी एक्सचेंज की समयसीमा खत्म होने के बाद भी पुराने नोटों का क्या होना था? इस बारे में छानबीन की जा रही है।
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सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि पकड़ी गई पुरानी करेंसी 1000 रुपये के नोटों में है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक हांडा सिटी कार में किसी बिल्डर की करोड़ों रुपये की पुरानी करेंसी लाई जा रही है।
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कार रुकवाते ही बैठे दो लोग कूदकर भागे

मामले में पूछताछ की जा रही है
मकदूमपुर चौकी इंचार्ज सतेंद्र सिंह, सिपाही मुकेश, रमाकांत, प्रदीप और चीता मोबाइल के सिपाही सुरेश व रामाशीष को चौराहा पर तैनात किया गया। रात करीब आठ बजे संदिग्ध हांडा सिटी कार नजर आई तो उसे रुकवा लिया गया। कार रुकते ही उसमें बैठे दो लोग कूदकर भाग निकले।

कार की तलाशी में डिग्गी से नोटों से भरा बैग बरामद हो गया। पुलिस ने गोसाईंगंज निवासी पेशे से वकील निर्भय मधेशिया, राजाबाजार चौक निवासी व विकासनगर में मोबाइल फोन का शोरूम चलाने वाले तारिक कदीर, नक्खास निवासी व चौक में प्रोवीजन स्टोर के मालिक हिमांशु गुप्ता को हिरासत में ले लिया।

पूछताछ में तारिक ने बताया कि कार में उसका भाई व प्रापर्टी का काम करने वाला शारिक उर्फ शब्बू व एक अन्य व्यक्ति भी था।

आसानी से लग जाएगा करेंसी मालिक का पता

करेंसी के बारे में पूछने पर सबने किसी भी तरह की जानकारी से इनकार कर दिया। तारिक ने कहा कि सभी लोग चौक से एसआरएस मॉल जा रहे थे। शारिक ने करेंसी गिनवाने की बात कहकर उसे साथ लिया था। पुराने नोटों से भरा बैग एसआरएस मॉल में किसी को देना था।

पुलिस का कहना है कि शारिक उर्फ शब्बू दो-तीन बिल्डरों के साथ काम करता है। हो सकता है कि रुपया उन्हीं बिल्डरों का हो। उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। उसने कार पकड़े जाने से पहले और बीते एक सप्ताह में किस-किस व्यक्ति से बात की है?

इसका जल्द पता लगा लिया जाएगा। इसके बाद पुरानी करेंसी के मालिक का आसानी से पता लगाया जा सकेगा।
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एनआरआई की समयसीमा भी 30 जून को खत्म हो चुकी

आम जनता के लिए पुरानी करेंसी बदलने के लिए भारत सरकार की समयसीमा काफी पहले खत्म हो चुकी है।

अनिवासी भारतीय (एनआरआई) के लिए यह समयसीमा 30 जून तक थी। यह अवधि भी खत्म हो चुकी है। इसके बाद भी पुरानी करेंसी क्यों और कौन मंगा रहा है? पुराने नोटों का क्या उपयोग है? यह सवाल पुलिस अधिकारियों के लिए पहेली बना हुआ है।
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