फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिशन यूपी के लिए मोदी ने तैनात किए 'सिपाही'

Wed, 28 May 2014 02:37 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं कि केंद्र में मजबूत बने रहने के लिए यूपी में मजबूती जरूरी है, इसलिए उन्होने 'मिशन यूपी' जीतने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं।
विज्ञापन


यूपी से सबसे ज्यादा मंत्री बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह, लघु उद्योग, जल संसाधन व कपड़ा जैसे बड़े मंत्रालय भी सूबे के कोटे में देकर मिशन यूपी पर आगे बढ़ने का संकेत दे दिया है।

उन्होंने जता दिया है कि केंद्र में सरकार बनाने के बावजूद वे इस सच्चाई को भूले नहीं हैं केंद्र में मजबूती के लिए यूपी में जनाधार होना बेहद जरूरी है।

इसीलिए केंद्र सरकार के विधिवत कार्य शुरू करने से पहले ही यूपी के भावी एजेंडे को साफ कर दिया है। बड़े व महत्वपूर्ण मंत्रालय यूपी के हिस्से में रखकर उन्होंने जनता से सीधे जुड़ने का इंतजाम किया है।
विज्ञापन

भूले नहीं यूपी में की गई घोषणाएं

प्रधानमंत्री ने यह भी संदेश देने की कोशिश भी की है कि वे उत्तर प्रदेश को लेकर की गई घोषणाओं को भूले नहीं हैं। केंद्र के बाद यूपी में भाजपा की सरकार बनवाना उनका अगला एजेंडा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के बाद सबसे महत्वपूर्ण गृह मंत्रालय को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को देकर मोदी ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश न सिर्फ प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करेगा बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर फैसलों का अधिकार भी उत्तर प्रदेश का ही होगा।

खास तौर से उत्तर प्रदेश की सपा सरकार को समझाने का प्रयास किया है कि कानून-व्यवस्था की अनदेखी, आतंकी घटनाओं के आरोपियों से नरमी और ‘सिमी’ जैसे संगठनों को ढील उसे स्वीकार नहीं होगी।

वोट बैंक के लिए पूर्वांचल व नेपाल की सीमा पर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटनाओं पर ढिलाई भी केंद्र सरकार पसंद नहीं करेगी। आतंकी घटनाओं के आरोपियों पर से मुकदमा उठाने जैसी बयानबाजी पर प्रदेश सरकार को रोक लगानी होगी अन्यथा केंद्र को कठोर रुख अख्तियार करना पड़ सकता है। प्रदेश सरकार न मानी तो उसकी मुसीबत बढ़ सकती है।

मोदी, राजनाथ ने किए थे हमले

मोदी और राजनाथ ने चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण नीति पर तीखे हमले किए थे।

दोनों नेता कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर प्रदेश सरकार को विफल बताने के साथ ही आगाह भी कर चुके हैं।

लखनऊ में गत 2 मार्च को हुई महारैली में मोदी की कही गई ये बातें किसी को भूली नहीं होंगी, ‘नेताजी! देश अब गुंडागर्दी की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा। नेताजी! यहां आपके पुत्र की सरकार है। यहां एक साल में 150 दंगे हुए हैं।’

स्वाभाविक है मोदी व राजनाथ अब इस तरह की स्थिति किसी भी रूप में नहीं चाहेंगे। प्रदेश सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अब बहुत सावधानी रखनी होगी। थोड़ी सी चूक प्रदेश सरकार को संकट में डाल सकती है।

ये हैं मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट

पूरे चुनाव प्रचार में मोदी का फोकस अगर सबसे ज्यादा किसी मुद्दे पर रहा है तो गंगा की सफाई पर और अटल बिहारी वाजपेयी के सपने नदियों को जोड़ने का काम पूरा करने का।

अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी बुंदेलखंड की झांसी सीट से सांसद चुनी गईं उमा भारती के कंधों पर डालकर मोदी ने न सिर्फ उमा का महत्व बढ़ाया है बल्कि उत्तर प्रदेश की हैसियत भी बढ़ाई है।

बेरोजगारी व उद्योगों पर भी नजर
लघु उद्योग मंत्रालय का जिम्मा कलराज मिश्र को देकर मोदी ने यूपी के कंधों पर देश में युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने का अवसर मुहैया कराने की जिम्मेदारी दी है।

साथ ही यह संदेश देने की कोशिश भी कि लघु उद्योगों के जरिये लोगों को स्वावलंबी बनाने और बेरोजगार युवकों को रोजगार मुहैया कराने के काम की शुरुआत उत्तर प्रदेश से हो। साथ ही विकास कार्यों का खाका भी खींचा जा सके।
विज्ञापन

मोदी के आश्वासन

रैलियों के दौरान मोदी ने अन्य तमाम मुद्दों के साथ यूपी में बुनकरों की मुसीबतों पर भी बात की और सरकार बनने पर इनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन भी दिया।

उन्होंने बरेली से सातवीं बार सांसद चुने गए संतोष गंगवार को कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी देकर साफ कर दिया है कि लोगों से किए वादों को पूरा करने के प्रति वे काफी गंभीर हैं।

उन्होंने वाराणसी के पड़ोस गाजीपुर से निर्वाचित मनोज सिन्हा को रेल राज्यमंत्री बनाकर यूपी, विशेष रूप से पूर्वांचल के लोगों को रेल यातायात की और अधिक सुविधाएं मुहैया कराने का संकेत दिया है।

मुजफ्फरनगर से सांसद चुने गए डॉ. संजीव बालियान को कृषि मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाकर भी उन्होंने यूपी का कद बढ़ाने की कोशिश की है। मोदी ने साफ कर दिया है कि गन्ना किसानों की समस्याओं को लेेकर भी वे चिंतित हैं तथा सूबे के किसानों को सरकार के साथ जोड़कर रखना चाहते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें