प्लाज्मा थेरेपी को लेकर केजीएमयू और पीजीआई में लगातार तैयारियां चल रही हैं। खुलासा हुआ है कि प्लाज्मा थेरेपी से मरीज पर किसी तरह का दुष्प्रभाव नहीं होता है। थेरेपी देने के दूसरे दिन ही मरीज में संक्रमण की दर कम हो जाती है।
ऐसे में चिकित्सा विशेषज्ञ स्थिति को कोरोना मरीजों के लिए सबसे कारगर मान रहे हैं। जॉन्स हॉकिन्स यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए शोध में बताया गया कि मार्च में 50 गंभीर रूप से बीमार मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई। इसमें से 30 मरीजों में थेरेपी देने के दूसरे दिन काफी सुधार पाया गया।
यह शोध रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है कि जब राजधानी के केजीएमयू और पीजीआई में प्लाज्मा डोनेशन को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों ने काम शुरू कर दिया है। आईसीएमआर की ओर से केजीएमयू और पीजीआई को प्लाज्मा का ट्रायल करने के लिए संस्तुति भी मिल चुकी है।