महिलाओं के जरिये प्रदेश में श्वेत क्रांति की शुरुआत के लिए प्रदेश सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री सामर्थ्य योजना लागू करेगी। महिलाएं पूरब से पश्चिम तक दूध और दूध से बने उत्पादों के डेयरी प्लांट संचालित करेंगी। सरकार के दो सौ करोड़ रूपये के शुरुआती निवेश से शुरू होली तीन कंपनियों में सवा लाख महिलाओं को रोजगार मिलेगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब सरकार ने पूरे प्रदेश में महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के लिए महिला सामर्थ्य योजना बनाई है। भारत सरकार ने बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, चंदौली और सोनभद्र को जोड़ते मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। तीन साल में इस प्रोजेक्ट पर करीब 43 करोड़ रूपये खर्च होंगे।
ग्राम्य विकास विभाग ने पूर्वांचल में गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज और कुशीनगर, अवध में रायबरेली, सुल्तानपुर और अमेठी में और पश्चिम में बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर तथा रामपुर में मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रदेश सरकार की ओर से एक कंपनी की स्थापना पर करीब 40 से 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कंपनी के लिए हर जिले में दूध संगहण केंद्र, कोल्ड चेन स्थापना की जाएगी।
महिलाओं को डेयरी प्लांट के संचालन के साथ दूध से मशीनों के जरिये मक्खन, दही, छाछ, घी सहित अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड की सहायक कंपनी एनडीडीबी डेरी सर्विसेज इन कंपनियों को तकनीकी सहयोग देगी। ग्राम्य विकास विभाग ने इसका कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किया है। कैबिनेट की आगामी बैठक में प्रस्ताव मंजूर किया जा सकता है।
बाजार उपलब्ध कराएगी सरकार
प्रदेश सरकार की ओर से मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की मार्केटिंग करने के साथ उन्हें बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनियों को शुरुआती आर्थिक मदद प्रदेश सरकार की ओर से की जाएगी। उसके बाद महिलाओं को कंपनी की आय के साथ बैंक ऋण से कंपनी का विस्तार करना होगा।