वाराणसी महायोजना-2031 को शासन ने मंजूरी दे दी है। महायोजना में शहर के रैपिड यातायात के लिए चार मेट्रो रेल मार्ग, छह अतिरिक्त बस अड्डों, 15 रेलवे ओवर ब्रिज और तीन रिवर ब्रिज और छह पार्किंग स्थलों के निर्माण का प्रस्ताव किया गया है।
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पंचकोसी यात्रा के लिए 24 मीटर चौड़ा पंच कोसीय मार्ग भी प्रस्तावित किया गया है। वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई वाराणसी महायोजना-2031 को नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने 17 जुलाई को स्वीकृति दी है।
यह योजना अनुमानित 32 लाख आबादी के मानक को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा एवं विकास को एक दूसरे का पूरक बनाने पर जोर है।
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12 क्षेत्रों में बांटा गया
महायोजना में विभिन्न भू उपयोगों के बीच सशक्त संबंध स्थापित करते हुए गंगा और वरुणा नदी, ऐतिहासिक भवनों और स्थलों, वास्तु कला भवनों के संरक्षण और मरम्मत के लिए प्रभावी नीति का निर्धारण किया गया है।
नगर को विकास की दृष्टि से विकेंद्रीकृत करते हुए 12 परिक्षेत्रों (जोन) में बांटा गया है।
शहर के हरित क्षेत्रों को मानकों के आधार पर महत्वपूर्ण स्थान देने के साथ ही आधुनिक समाज में प्रचलित मिश्रित भू-उपयोग को मुख्य मार्गों पर विकास को नियंत्रित करने के लिए प्रस्तावित किया गया है।
45 फीसदी भू-उपयोग आवासीय
महायोजना का कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल 26080 हेक्टेअर है। इसमें पार्क, खुला क्षेत्र और हरित पट्टी के लिए 3527.54 हेक्टेअर (13.53 प्रतिशत), शैक्षिक संस्थाओं के लिए 1153.68 हेक्टेअर (4.42 प्रतिशत), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 404.89 हेक्टेअर (1.55 प्रतिशत), तकनीकी शैक्षिक संस्थाओं के लिए 220.67 है (0.85 प्रतिशत)।
वहीं ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों के लिए 501 हेक्टेअर (1.92 प्रतिशत) यातायात एवं परिवहन के लिए 3350.81 हेक्टेअर (12.87 प्रतिशत), आवासीय क्षेत्र के लिए 11898.11 हेक्टेअर (45.62 प्रतिशत), मिश्रित भू-उपयोग के लिए 1423.76 हेक्टेअर (5.46 प्रतिशत), व्यावसायिक एवं औद्योगिक के लिए क्रमश: 1057.24 हेक्टेअर (4.05 प्रतिशत) एवं 663.15 हेक्टेअर (2.54 प्रतिशत) भूमि प्रस्तावित की गई है।
महायोजना में पंचकोसी यात्रा के लिए 24 मीटर चौड़े पंचकोसीय मार्ग का प्रस्ताव दिया गया है। मानकों के अनुसार आवश्यक अतिरिक्त हाईस्कूल एवं इंटर कालेज, महाविद्यालयों, तकनीकी संस्थाओं, विश्वविद्यालयों के लिए भूमि का प्रस्ताव दिया गया है।
नगर में सात अतिरिक्त अग्निशमन केंद्रों, चार प्रधान डाकघर, 190 उप डाकघर, चिकित्सालयों, मातृ शिशु कल्याण केंद्रों, पुलिस स्टेशन, होमगार्ड स्टेशन आदि के लिये भी भूमि का प्रस्ताव दिया गया है। शासन ने उम्मीद जताई है कि वाराणसी महायोजना-2031, नगर के विकास का मार्ग खोलेगी।
संस्कृति और विद्यार्जन का प्रमुख केंद्र महायोजना में कहा गया है कि वाराणसी भारत का संस्कृति एवं विद्यार्जन का प्रमुख केंद्र रहा है। वहां इस समय तीन विश्वविद्यालय, बीएचयू, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय एवं महात्मा गांधी विद्यापीठ हैं।
सारनाथ बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है। वहां तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान को विश्वविद्यालय स्तर का दर्जा है। काशी पौराणिक काल से ही देश के प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात हैं।