पीएचडी के दाखिले शिक्षक के पास उपलब्ध सीटों के आधार पर तय होते हैं। इसके अनुसार एक प्रोफेसर एक समय में आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह तथा असिस्टेंट प्रोफेसर एक समय में सिर्फ चार शोधार्थियों को पीएचडी करा सकता है।
लविवि में अभी पिछले महीने ही करीब 20 शिक्षकों का प्रमोशन हुआ है। इस तरह से 40 सीटें तो केवल प्रमोशन की वजह से ही बढ़ गई हैं। इसके अलावा पिछले कुछ महीनों में पीएचडी अवार्ड भी हुई हैं। इसलिए पीएचडी की और सीटें भी उपलब्ध होंगी। इसलिए लविवि ने जुलाई में पीएचडी प्रवेश करने का फैसला किया है।
शून्य नहीं होगा सत्र
लविवि में प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा ने कहा, लविवि में पीएचडी का सत्र शून्य नहीं किया जाएगा। परास्नातक की प्रवेश प्रक्रिया संपन्न होने के बाद जुलाई से इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस तरह से दाखिले के लिए और सीट खाली हो जाएंगी।