सीबीएसई ने सभी स्कूलों को जोड़ने के लिए कवायद शुरू कर दी है। इसके अंतर्गत स्कूलों को कोलाबोरेटिव लर्निंग हब (सीएलएच) बनाया गया है। इसके तहत शहर के सभी स्कूलों के लीड कोलाबरेटर के लिए 30 मई को सेक्टर-27 स्थित मोती राम आर्य स्कूल में ओरिएंटेशन प्रोग्राम रखा गया है।
कोलाबरेटिव लर्निंग हब के तहत चंडीगढ़ के सभी स्कूलों को आपस में जोड़ा गया है। यह स्कूल अपने संसाधनों को अन्य स्कूलों के साथ साझा करेंगे। जरूरत पड़ने पर टीचर भी एक दूसरे के स्कूल में पढ़ा सकेंगे। लर्निंग हब 1 जुलाई से काम करना शुरू कर देंगे। एक लर्निंग हब में पांच या उससे अधिक स्कूल शामिल होंगे।
संयुक्त तरीके से कार्यक्रमों का करेंगे आयोजन
सीबीएसई की ओर से हो रही इस अनोखी पहल के बाद एक लर्निंग हब के अंदर आने वाले स्कूल अलग अलग गतिविधियों में एक दूसरे का सहयोग कर सकेंगे। बोर्ड की ओर से कहा गया है कि स्कूल वाले क्षमता निर्माण में एक दूसरे की मदद करेंगे। इन स्कूलों के बीच आपस में शिक्षक और छात्रों के आदान प्रदान का कार्यक्रम भी होगा।
साथ ही कैंपस भी एक दूसरे का साझा कर सकेंगे। स्कूल आपस में मिलकर संयुक्त तरीके से कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। स्कूलों से आपस में शैक्षिक सहयोग के कार्यक्रम भी होंगे। स्कूलों के आपस में सहयोग से छात्रों को सीखने के लिए अधिक मौके मिलेंगे।
विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
इसका सबसे ज्यादा फायदा यह होगा कि आधारभूत ढांचा और शिक्षकों की कमी की वजह से किसी स्कूल में पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। किसी स्कूल में अगर शिक्षक की कमी है तो उसकी पूर्ति दूसरे स्कूल से की जा सकेगी। हर स्कूल के पास कुछ बहुत अच्छे शिक्षक होते हैं।
अब इस तरह के शिक्षक अन्य स्कूलों के शिक्षकों की मदद करेंगे। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधित जरूरतों के साथ भी होगा। वर्तमान में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां अभी संसाधनों का अभाव है। वहीं, कुछ संस्थान ऐसे भी हैं, जिनके पास संसाधन तो हैं, लेकिन वे उनका पूरा उपयोग नहीं कर पाते हैं। ये आपस में संसाधन साझा कर एक-दूसरे की मदद करेंगे।
स्कूलों को विभिन्न संस्थानों और बिजनेस हाउस से जोड़ने का प्रस्ताव
सभी लर्निंग हब अपने आसपास में स्थित औद्योगिक इकाइयों, कारखानों, प्रशासकीय मुख्यालयों, सुरक्षा सेवाओं, बिजनेस हाउस से भी जुड़ेंगे। इसके जरिए छात्र उनसे कुछ सीख सकें और जीवन व समाज के बारे में गहरी जानकारी हासिल हो सके। लर्निंग हब को कल्याणकारी गतिविधियों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए गांव, मोहल्ला, वार्ड को गोद लेकर उनको विकसित करेंगे।
हब में शामिल स्कूल छात्रों के लिए कुछ अहम मामलों सुरक्षा, सलामती, ऊर्जा और जल संरक्षण, पर्यावरण, डिजिटल नवाचार और मूल्यों एवं नेतृत्व कौशल सेमिनारों के लिए प्रोत्साहित करेंगे। लर्निग हब में शामिल स्कूल आपस में खेलकूद की सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, सभागारों को भी आपस में साझा करेंगे।
30 मई को सभी की जिम्मेदारी हो जाएगी तय
कोलाबरेटिव लर्निंग हब का मकसद शहर के सभी स्कूलों को जोड़ना है। सीबीएसई की तरफ से ऐसा पूरे देश में किया जा रहा है। इसके लिए चंडीगढ़ में स्कूलों के लीड कोलाबरेटर एक-दो मीटिंग कर भी चुके हैं। कई कार्यक्रम भी इसके तहत आयोजित भी किए जा चुके हैं। सभी की जिम्मेदारियां क्या होंगी, यह 30 मई को होने वाले ओरिएंटेशन प्रोग्राम में साफ हो पाएगा।
- रीमा दीवान, प्रिंसिपल व सिटी सीबीएसई कॉर्डिनेटर