लखनऊ विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया फिर विवादों में है। विवि प्रशासन द्वारा लगभग एक साल देरी से सत्र 2020-21 की प्रवेश आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इसे लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है।
विवि के दो विभागों में अभी सत्र 2019-20 के पीएचडी प्रवेश नहीं हो पाए। वहीं इसमें एक विभाग में विवि ने नए सत्र 2020-21 में भी सीटों का निर्धारण कर दिया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
विश्वविद्यालय में सत्र 2019-20 में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया काफी देरी तक चली। इसके बाद भी कुछ कारणों से कंप्यूटर साइंस व होम साइंस विभाग में इसके प्रवेश नहीं हो पाए।
इन सबके बीच सत्र 2020-21 में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया विवि द्वारा आयोजित ही नहीं की जा सकी। अब जब नए सत्र 2021-22 के लिए यूजी-पीजी की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई तो उसके साथ ही पीएचडी की सत्र 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया भी आयोजित की जा रही है।
जानकारी के अनुसार अभी तक कंप्यूटर साइंस व होम साइंस विभाग में पिछले साल के पीएचडी प्रवेश नहीं हो सके हैं।
जबकि नए सत्र के लिए विवि प्रशासन ने कंप्यूटर साइंस में 06 सीटों का निर्धारण कर दिया है। बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले साल के प्रवेश ही नहीं हो पाए तो किस आधार पर नए साल में पीएचडी की सीटों का निर्धारण कर दिया गया। इस पर विश्वविद्यालय के किसी जिम्मेदार अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।
अभ्यर्थियों को दोहरा झटका
विश्वविद्यालय ने उस समय अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए इन दो विभागों की प्रवेश प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। इसके बाद विवि की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। अब लगभग दो साल से उक्त विभागों में प्रवेश के लिए विद्यार्थी भटक रहे हैं। इतना ही नहीं हाल में जब अभ्यर्थियों व उनके अभिभावकों ने इसके लिए विश्वविद्यालय के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्हें नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन का सुझाव दे दिया गया। इस तरह जहां अभ्यर्थियों का साल खराब हुआ वहीं अब उन्हें दोहरा आर्थिक झटका भी झेलना पड़ेगा।
संज्ञान में है मामला
प्रवक्ता, लविवि, डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि यह मामला विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में है। इसमें जो भी दिक्कतें हैं, उन्हें जल्द ही दूर कराकर प्रवेश पूरे किए जाएंगे। विद्यार्थियों को दो बार आवेदन न करना पड़े, इसके भी प्रयास करेंगे। सीटों का निर्धारण विभाग की ओर से ही किया जाता है।