संजय गांधी पीजीआई के जनरल हॉस्पिटल में नौ घंटे दर्द से तड़पते-तड़पते प्रसूता ने मनीषा (27) ने दम तोड़ दिया। बुधवार शाम उसे पीजीआई के इमरजेंसी लाया गया। इमरजेंसी में बेड नहीं मिला। तड़के तीन बजे उसे वहां से जनरल हॉस्पिटल भेज दिया गया।
पर वहां भी किसी डॉक्टर ने नहीं देखा। स्ट्रेचर पर पत्नी को लिए पति गिड़गिड़ाता रहा। सुबह 7 से 11 बज गए। डॉक्टर उसे अनसुना करते रहे। टालते रहे। चाय पीते रहे। आखिर मनीषा चल बसी।
बलिया के सिसवार कला थाना नगरा निवासी रामदास की पत्नी मनीषा का 20 सितंबर को एक निजी नर्सिंग होम में बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद मनीषा घर चली गई लेकिन दो दिन बाद ही उसके पेट में दर्द होने लगा। यही नहीं बाद में उसका पेट भी फूलने लगा।
उसने बलिया में ही चिकित्सकों को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसपर रामदास पत्नी को लेकर बुधवार शाम एसजीपीजीआई आ गया। यहां इमरजेंसी पहुंचा लेकिन उसे बेड नहीं मिला। रामदास का कहना है कि तड़के तीन बजे उसे बताया गया कि इमरजेंसी में न तो बेड खाली है और न कोई गायनेकोलॉजिस्ट है।