पोस्ट ग्रेजुएशन करके लौटे प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के डॉक्टरों से स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद थी कि वे वर्तमान जरूरत के अनुसार ड्यूटी करेंगे, लेकिन यह उम्मीद अब स्वास्थ्य विभाग को भारी पड़ रही है। पीएचसी पर तैनात ये सभी डॉक्टर पीजी पाठ्यक्रम के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय से एनओसी लेकर पढ़ने गए थे, पर अब वे फ्रंट लाइन कोरोना फाइटर बनने से बच रहे हैं।
एमबीबीएस डिग्री वाले चिकित्साधिकारी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती दी जाती है। जबकि विशेषज्ञ चिकित्सकों को जरूरत के अनुसार सीएचसी या फिर जिला-संयुक्त चिकित्सालयों में तैनात होते हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ को सीएमओ महाराजगंज के अधीन तैनाती दी गई है। यानी अधिकतम को सीएचसी पर ही तैनाती का मौका मिलेगा। इसी तरह एनेस्थेटिस्ट, एमडी मेडिसिन, एमडी टीबी एंड चेस्ट की डिग्री वालों को लेवल टू कोविड अस्पताल में तैनाती दी गई है।
महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि एनेस्थेटिस्ट, टीबी व चेस्ट रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और एमडी मेडिसिन को लेवल टू में भेजा गया है। कोरोना महामारी काल में एमसीएच विंग, सीएचसी पर लेवल टू अस्पताल बनाए गए हैं। विशेषज्ञों की जरूरत को देखते हुए उन्हें तैनाती दी गई है। महामारी खत्म होने के बाद सीएचसी व एमसीएच विंग से इन विशेषज्ञों को हटाया जाएगा।